विपक्ष संविधान के अनुच्छेद 94 सी के तहत नो कॉन्फिडेंस मोशन लाने की तैयारी में है।विपक्ष का आरोप है कि सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं दी गई।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सदन में की गई टिप्पणियों को लेकर उन पर कार्रवाई शुरू नहीं करने और कांग्रेस की महिला सांसदों पर बिना साक्ष्य के आरोप लगाये जाने के मामले में भी अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव के लिए नोटिस देने पर विचार किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस संबंध में जल्द ही लोकसभा में एक वैधानिक प्रस्ताव लाया जा सकता है।विपक्ष प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा के 100 सदस्यों के हस्ताक्षर लेने का प्रयास कर रहा है। 100 सांसदों के हस्ताक्षर होने के बाद इसे लोकसभा सचिवालय को सौंपा जाएगा।इस नोटिस पर अधिक से अधिक विपक्षी दलों के सांसदों के हस्ताक्षर लेने का प्रयास किया जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष को झटका दे सकते हैं।संसद भवन परिसर में मीडिया के साथ बातचीत में अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि स्पीकर का अपना सम्मान होता है, सदन की अपनी गरिमा होती है। हमने उन मामलों पर चर्चा की है; देखते हैं, इसका क्या नतीजा निकलता है।हमारे लिए जो जरूरी है वह यह है कि जिस तरह से बाजार खोला जा रहा है, उस पर चर्चा होनी चाहिए।विपक्ष में हम सभी चाहते हैं कि सदन चले, और ऐसे समय में सदन का चलना और भी जरूरी हो जाता है जब अमेरिका के साथ इतनी बड़ी डील साइन हुई है – यह कोई डील नहीं है, यह तो सब कुछ लुटा देना है।
बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर तृणमलू कांग्रेस भी विपक्ष को झटका दे सकती है। इस मामले में टीएमसी के रुख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आज सुबह संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में, (लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ) अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार किया गया। बैठक में तृणमूल कांग्रेस, वाम दल, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (शप) सहित कुछ अन्य पार्टियों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया।
