महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत सभी लोगों की मौत हो गई। विमानन महानिदेशालय DGCA ने भी विमान हादसे में अजित पवार समेत सभी लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, अजित पवार के प्लेन क्रैश की असल वजह जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। इसके लिए दिल्ली से AAIB की टीम जांच करने जा रही है। मगर, शुरुआती रिपोर्टों में तकनीकी खामी की बात सामने आई है।यह कहा जा रहा है कि पायलट ने संकरे रनवे पर उतरने के लिए इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगी थी। मगर, विमान का नोज रनवे पर टकरा गया। यूरोपियन ट्रांसपोर्ट सेफ्टी काउंसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में 90 प्रतिशत प्लेन क्रैश की बड़ी वजह टेक्निकल फाल्ट होते हैं। साथ ही खराब मौसम भी प्लेन क्रैश का जिम्मेदार हो सकता है।
अजित पवार एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपने लिए जगह खुद बनाई।वे छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे, उन्होंने कम बोलने और ज्यादा काम करने को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाया था।
अजित पवार जब काॅलेज में थे उसी वक्त उनके पिता की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद अजित पवार को परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ी और पढ़ाई छोड़नी पड़ी।उस वक्त शरद पवार राजनीति में अपनी जगह बना चुके थे, लेकिन अजित पवार ने उनका सहारा नहीं लिया, बल्कि अपने लिए राजनीति में खुद जगह बनाई। वे जमीन से जुड़े नेता थे और इसके लिए उन्होंने जमीन से जुड़कर काम किया।
पिता की मौत के बाद अजित पवार पर हर तरह की जिम्मेदारी आ गई थी, बारामती में उस समय किसान संकट में थे।चाचा शरद पवार के पदचिह्नों पर चलते हुए अजित पवार ने बारामती के किसानों के साथ काम किया और उनकी समस्याओं को अपना समझा। इस तरह वे एक जननेता के रूप में उभरे।
अजित पवार ने 1982 में राजनीति में कदम रखा और बारामती विधानसभा क्षेत्र से 7 बार चुनाव जीता। उन्होंने 1991 में बारामती लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता, लेकिन उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी थी।उन्होंने 1991 से 1992 तक सुधाकर राव नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के तौर पर काम किया। 1992 में शरद पवार मुख्यमंत्री बने, तो वे मृदा संरक्षण, बिजली और योजना राज्य मंत्री बने।1999 में, INC-NCP गठबंधन सरकार के हिस्से के तौर पर, वे सिंचाई मंत्री बने।इसके अलावा, 2003 में वे ग्रामीण विकास मंत्री बने। 2004 के विधानसभा चुनावों में INC-NCP गठबंधन की जीत के बाद, वे देशमुख और बाद में अशोक चव्हाण की कैबिनेट में जल संसाधन मंत्री बनाए गए। अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेता थे। वे छह बार प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने. उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।
