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आवाज में हो रहा बदलाव तो हल्के में न लें, इन डेंजरस बीमारियों का मिलता है सिग्नल

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मौसम बदलने, सर्दी जुकाम या गले के हल्के संक्रमण के दौरान आवाज में बदलाव आना आम बात होती है।कई बार यह दिक्कत दो-तीन दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाती है, लेकिन अगर लंबे समय से आपकी आवाज बदली हुई महसूस हो रही है और घरेलू उपाय या इलाज से भी सुधार नहीं हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। दरअसल हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार आवाज में लगातार बदलाव कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। जिन पर समय रहते ध्यान देना बहुत जरूरी है।ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं की आवाज में हो रहा है बदलाव तो कौन सी बीमारियों का यह सिग्नल हो सकता है।

यूरेशियन जनरल ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार हाइपोथायरायडिज्म यानी अंडर एक्टिव थायराॅइड की कंडीशन में कई लोगों को आवाज से जुड़ी परेशानी हो सकती है। इस बीमारी में थायराॅइड ग्रंथि जरूरी हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाती है, जिसका असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ मरीजों में शुरुआती लक्षण के तौर पर आवाज भारी होना, कर्कश हो जाना या आवाज पहले जैसी स्पष्ट न रहना महसूस किया गया है।एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आवाज में बदलाव के आधार पर थायराॅइड विकार की पहचान शुरुआती स्टेज में ही की जा सकती है।

डॉक्टर बताते हैं कि थायराॅइड से जुड़ी दिक्कतों में आवाज रफ हो सकती है, धीरे निकलने लगती है या बोलने में थकान महसूस होती है। कई लोगों को बोलते समय कर्कश आवाज आने की शिकायत भी रहती है।थायराॅइड ग्रंथि के ठीक से काम न करने पर शरीर की एक्टिविटी धीमी होने लगती है, जिससे तंत्रिकाओं और वोकल कॉर्ड्स पर भी असर पड़ सकता है।यही कारण है कि आवाज में बदलाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार हाइपोथायरायडिज्म के शुरुआती संकेतों में लगातार थकान, तेजी से वजन बढ़ाना और मेटाबॉलिज्म का धीमा होना शामिल है। इसके अलावा इसमें ज्यादा ठंड लगना, कब्ज और स्किन का रूखापन मांसपेशियों में कमजोरी, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, जोड़ों में दर्द या जकड़न, पीरियड्स में गड़बड़ी, बालों का झड़ना और हार्ट रेट का धीमा होना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार आवाज में बदलाव सिर्फ थायराॅइड ही नहीं बल्कि अन्य गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। ज्यादा आवाज का इस्तेमाल, वोकल कॉर्ड्स पर गांठ या गले का कैंसर भी इसकी वजह बन सकता है।एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कई बार वॉइस बॉक्स का कैंसर भी आवाज खराब होने के रूप में सामने आता है।अगर इसका समय पर पता चल जाए तो आधुनिक टेक्नोलॉजी से इलाज संभव है। वहीं एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर आवाज 7 दिनों से ज्यादा समय तक ठीक नहीं हो रही है तो इएनटी या वॉइस स्पेशलिस्ट से जांच करना जरूरी है। शुरुआती जांच से न सिर्फ बीमारी का सही कारण पता चलता है, बल्कि समय रहते इलाज भी संभव हो पाता है।

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