संसद सत्र से पहले सोनिया-राहुल के खिलाफ केस, विपक्ष देगा साथ !

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संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार (1 दिसंबर 2025) से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें सरकार 14 अहम विधेयक पेश करने जा रही है। विपक्ष 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चीन और लाल किला के पास ब्लास्ट के मुद्दे पर केंद्र को घेरने की की तैयारी में है। संसद सत्र से पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की है, जिससे राजनीति गरमा गई है।

लोकसभा चुनाव 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तब से इस बात जोर देते आ रहे हैं कि कांग्रेस की पहचान भ्रष्टाचार से जुडी हुई है, जिसकी पहुंच गांधी परिवार तक है. EOW के एफआईआर में राहुल और सोनिया गांधी के अलावा 3 कंपनियों और 6 अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं। इन सभी पर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को धोखाधड़ी से हासिल करने का आरोप है।

यह मामला उन आरोपों पर आधारित है कि नेताओं और उनके सहयोगियों ने मिलकर उस कंपनी का गलत तरीके से नियंत्रण हासिल किया, जो पहले कांग्रेस से जुड़ी थी और जिसकी संपत्ति लगभग 2,000 करोड़ रुपये की थी।3 अक्टूबर को दर्ज एफआईआर के अनुसार, यह अधिग्रहण यंग इंडियन के जरिए किया गया। यंग इंडियन में राहुल और सोनिया गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी हैं।

ईडी ने पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66 (2) के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल किया।यह धारा संघीय एजेंसी को कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए साक्ष्य साझा करने की अनुमति देती है, ताकि वह जांच को आगे बढ़ाने के लिए धन शोधन का मामला दर्ज कर सके। प्राथमिकी ईडी के मामले और आरोपपत्र को मजबूत करने का काम करेगी।

यह मामला दिल्ली के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश से संबंधित है, जिसने 26 जून 2014 को नेशनल हेराल्ड के मामलों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत पर संज्ञान लिया था। प्राथमिकी में ईडी की ओर से 4 सितंबर को ईओडब्ल्यू को भेजे गए पत्र में लगाए गए आरोपों का संज्ञान लिया गया है।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक्स पर एक पोस्ट कर कहा कि न तो नई शराब है, न नई बोतल और न ही नया गिलास। यह एक ऐसा अनोखा मामला है, जहां न तो कोई पैसा इधर-उधर हुआ, न ही कोई अचल संपत्ति हस्तांतरित हुई, फिर भी धन शोधन का मामला खोज लिया गया।उन्होंने कहा कि जब भी पार्टी कोई मुद्दा उठाना चाहती है तो ऐसे पुराने मामले फिर से उछाल दिए जाते हैं।

शीतकालीन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले कांग्रेस राहुल और सोनिया गांधी पर एफआईआर दर्ज होना पार्टी पर प्रभाव डाल सकता है। अब कांग्रेस को इस मुद्दे से भी लड़ना होगा।हेराल्ड मामले में कोर्ट 16 दिसंबर 2025 को अपना फैसला सुनाएगी।अगर फैसला कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को कठघरे में खड़ा करता है तो यह लड़ाई को और कमजोर कर देगा।

कांग्रेस के भीतर यह उम्मीद जताई जा रही है कि कार्यकर्ता अपना रुख बदलेंगे और गांधी परिवार पर ध्यान केंद्रित करेंगे, लेकिन राहुल गांधी की प्लानिंग ऐसी नहीं थी।वह कर्नाटक के सत्ता संघर्ष को भी ठंडे बस्ते में डालना चाहते थे क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि 14 दिसंबर की महारैली और SIR से ध्यान भटकाया जाए।इस समय कांग्रेस को इंडिया गठबंधन के अपने सहयोगियों की जरूरत होगी।सवाल है कि डीएमके, टीएमसी, आरजेडी जैसे विपक्षी दल, जिन पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे संसद में गांधी परिवार का समर्थन और समर्थन करेंगे?

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