शीतकालीन सत्र से पहले राज्यसभा का फरमान,नारेबाजी नहीं,विपक्ष को लग सकती है मिर्ची

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संसद के शीतकालीन सत्र से पहले राज्यसभा की ओर से एक बुलेटिन जारी कर सदस्यों को सदन के सामान्य शिष्टाचार के बारे में आगाह किया गया है। इस बुलेटिन में सदस्यों को यह याद दिलाया गया है कि चेयर की ओर से जो भी रूलिंग दी जाती है, उसकी सदन के अंदर या बाहर कहीं भी आलोचना नहीं होनी चाहिए। साथ ही साथ इसमें नारेबाजी से भी मनाही की गई है। गौरतलब है कि सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने के बाद यह राज्यसभा के सभापति के रूप में उनका पहला संसदीय सत्र है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्यसभा की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया है कि चेयर की ओर से सदन की निर्धारित मान्यताओं के आधार पर ही निर्णय दिए जाते हैं और अगर ऐसा कोई उदाहरण मौजूद नहीं है तो आम संसदीय परंपराओं का पालन करते हुए फैसला सुनता है। चेयर की ओर से दिए जाने वाले निर्णय की सदन के भीतर या बाहर सीधे अथवा परोक्ष रूप से आलोचना नहीं होनी चाहिए।

इस बुलेटिन में आगे कहा गया है कि सदन की कार्यवाही की मर्यादा और गंभीरता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि ‘थैंक्स’, ‘थैंक्य यू’ या यहां तक कि ‘जय हिंद’, ‘वंदे मातरम्’ या अन्य कोई भी नारेबाजी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए संसदीय रीतियों और परंपराओं का हवाला दिया गया है।

सोमवार को जारी बुलेटिन में सांसदों को यह भी याद दिलाया गया है कि सदन में तख्तियां दिखाने की अनुमति नहीं है और अगर कोई सांसद किसी अन्य एमपी या मंत्री की आलोचना करता है और फिर उसके जवाब के समय अनुपस्थित हो जाता है तो यह भी शिष्टाचार का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अनुसार अगर एक सांसद किसी दूसरे सदस्य या मंत्री की आलोचना करता है तो यह उम्मीद की जाती है कि जवाब देते वक्त उसे सुनने के लिए भी सदन में उपस्थित रहे। जवाब के समय अनुपस्थित होना संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन है।

वैसे तो यह संसद के दोनों सदनों के स्टैंडर्ड हैंडबुक का हिस्सा है, लेकिन जारी किए गए बुलेटिन की अहमियत इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण पहली बार राज्यसभा की कार्यवाही का सभापतित्व करेंगे। पिछले कुछ वर्षों में राज्यसभा सभापति और विपक्षी सांसदों के संबंधों में बहुत ज्यादा कड़वाहट देखने को मिली है। यहां तक कि विपक्ष ने पहली बार तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ महाभियोग तक का नोटिस दे दिया था। हालांकि, उपसभापति हरिवंश ने इस नोटिस को ‘गंभीर रूप से दोषपूर्ण’ और संवैधानिक पद को नीचा दिखाने के लक्ष्य से लाया गया बताकर खारिज कर दिया था।

संसद का शीतकालीन सत्र इस बार 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कुल 15 बैठकें होंगी। इस बार यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि धनखड़ से बार-बार उलझने वाला विपक्ष, राधाकृष्णन के कार्यकाल में क्या रुख अपनाता है।

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