पिछले कुछ समय से बीमारियों ने तेजी से लोगों के अंदर अपना घर बना लिया है।यही कारण है कि हर घर की दवाइयों की डिब्बी में कुछ न कुछ गोलियां जरूर पड़ी मिलती हैं, बुखार हो, खांसी हो या गले में खराश।जी हां, बात हो रही है एंटीबायोटिक्स की, जिनका लोग अक्सर जल्दी राहत के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं। लेकिन एक्सपर्ट साफ चेतावनी देते हैं कि आज की यह आदत आगे चलकर उलटा भी पड़ सकती है।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, जिसे कभी दूर की समस्या समझा जाता था, अब तेजी से बढ़ता हुआ खतरा बन चुका है। इन दवाओं का गलत इस्तेमाल साधारण इंफेक्शन को भी जटिल बना देता है और आपको ज्यादा संवेदनशील बनाकर छोड़ देता है।
पिछले कुछ वर्षों से दुनिया भर के डॉक्टर इस शांत लेकिन खतरनाक संकट पर लगातार अलार्म बजा रहे हैं। एंटीबायोटिक्स अब पहले जैसी प्रभावी नहीं रहीं। ऑरो सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना की कंसल्टेंट फिजिशियन (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. अमृता गुप्ता बताती हैं कि एंटीबायोटिक्स कभी चमत्कारिक दवाएं मानी जाती थीं, लेकिन इनके बेधड़क इस्तेमाल ने बैक्टीरिया को बदलने और मजबूत होने का मौका दे दिया। अब अक्सर ऐसे मरीज आते हैं जिनके साधारण इंफेक्शन भी बेसिक एंटीबायोटिक्स से ठीक नहीं होते।इसकी सबसे बड़ी वजह है खुद से दवा लेना, कोर्स अधूरा छोड़ देना या दवाओं का गलत इस्तेमाल करना।नतीजा यह है कि अब इंफेक्शन ज्यादा कठिन, महंगे और जोखिम भरे इलाज की तरफ धकेल रहे हैं।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस को दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों में शामिल किया है। भारत में यह समस्या इसलिए और तेजी से बढ़ रही है क्योंकि यहां बिना प्रिस्क्रिप्शन भी एंटीबायोटिक्स आसानी से मिल जाती हैं और कई जगह दवाएं देने का तरीका भी अलग होता है, लोग डॉक्टर की सलाह नहीं लेते हैं।डॉक्टरअमृता गुप्ता कहती हैं कि अब यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है।एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल पूरी कम्युनिटी को खतरे में डाल सकता है क्योंकि इससे दवा-रोधी इंफेक्शन फैलते जाते हैं।
खुद को सुरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए
खुद से एंटीबायोटिक लेना बंद करें – घर में बची हुई दवाएं लेना फायदेमंद नहीं, बल्कि हानिकारक है।डॉक्टर अमृता गुप्ता बताती हैं कि बिना डॉक्टर की राय के एंटीबायोटिक बिल्कुल न लें। साधारण जुकाम या वायरल बुखार में इनकी जरूरत ही नहीं होती।
दवा का पूरा कोर्स पूरा करें – आधा ठीक लगने पर दवा छोड़ देना सबसे बड़ी गलती है. बीच में एंटीबायोटिक रोकने से सबसे मजबूत बैक्टीरिया बच जाते हैं और रेजिस्टेंट बन जाते हैं. इसलिए पूरा कोर्स खत्म करना जरूरी है.
डॉक्टर से एंटीबायोटिक की जिद न करें – डॉक्टर जानते हैं कि कब एंटीबायोटिक की जरूरत है. अगर डॉक्टर दवा नहीं देते, तो उनके निर्णय पर भरोसा करें।
