ललन सिंह ने कहा कि “चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है, हम सब उसका सम्मान करते हैं। लेकिन जिस वीडियो की बात की जा रही है, उसे अगर कोई पूरा सुनेगा तो सच्चाई सामने आ जाएगी। आरजेडी ने उस वीडियो को भ्रामक तरीके से ट्वीट किया है। उन्होंने बताया कि जिस गांव का वीडियो वायरल हुआ है, वहां आरजेडी के एक दबंग नेता गरीबों को डरा-धमकाकर बूथ तक जाने से रोकते हैं।इसी पर उन्होंने कहा था कि “अगर कोई नेता गरीबों को धमकाए तो गांव वाले उन्हें रोकें।मतदान कराकर घर भेज दें। गरीबों को डराकर वोट नहीं लिया जा सकता।
ललन सिंह का कहना है कि उनके बयान का मकसद गरीबों को उनका हक दिलाना था, न कि किसी को भड़काना।उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र में वोट हर नागरिक का अधिकार है और किसी को भी इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए ललन सिंह से स्पष्टीकरण मांगा था कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।जवाब से असंतुष्ट आयोग ने मोकामा थाने में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
वहीं, आरजेडी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ललन सिंह पर हमला बोलते। हुए, कहा कि सत्ता पक्ष के अलनेता खुलेआम धमकी भरे बयान दे रहे हैं और चुनाव आयोग सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रहा है।अब देखना दिलचस्प होगा कि ललन सिंह की सफाई के बाद यह मामला क्या रुख क्या रुख अपनाता है ।
