महागठबंधन में सीट का बंटवारा नहीं लेकिन तेजस्वी यादव ने राघोपुर से भरा पर्चा

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बिहार में महागठबंधन का सबसे बड़े चेहरे तेजस्वी यादव ने आज अपना नामांकन दाखिल कर दिया हैं वो भी तब जब गठबंधन में अभी सीट शेयरिंग का औपचारिक ऐलान होना बाकी है। लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती के साथ तेजस्वी यादव नामांकन करने गए थे। ये तीसरा मौका है जब तेजस्वी ने राघोपुर सीट से अपना पर्चा दाखिल किया।

वैशाली जिले की राघोपुर सीट आरजेडी की पारंपरिक सीट है। लालू प्रसाद यादव ने इस सीट से जीत का सिलसिला शुरू किया था फिर राबड़ी देवी यहां से जीतीं। हालांकि 2010 में एक बार यहां जेडीयू के सतीश कुमार जीत चुके हैं, लेकिन तेजस्वी ने 2015 के बाद 2020 में यहीं से जीत दर्ज की थी। आज तीसरी बार पर्चा दाखिल कर रहे हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने बीजेपी के सतीश कुमार को 38,174 वोटों से हराया था, 2015 में जीत का मार्जिन कम था, लेकिन बीजेपी के सतीश कुमार को 22,733 हज़ार वोटों से हराने में कामयाब रहे थे।

इस बार तेजस्वी यादव के मुकाबले में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने चंचल कुमार को टिकट दिया है जबकि बीजेपी के उम्मीदवार के नाम का औपचारिक ऐलान होना बाकी है। नामांकन से पहले दिल्ली में तेजस्वी और कांग्रेस नेताओं के बीच सीट शेयरिंग पर लगभग मुहर लग चुकी है।

इस बीच आज महागठबंधन सीट शेयरिंग का ऐलान कर सकता है। गठबंधन में सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर सहमति बन गई है। जानकारी के मुताबिक RJD 134 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि कांग्रेस को 60 सीट देने पर सहमति बनी है। लेफ्ट पार्टीज़ को 31 सीट दी जा सकती हैं इनमें CPI ML को 21 जबकि CPI और CPM को 10 सीटें दी जा सकती है। मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी यानी VIP को 15 सीटों पर संतोष करना पड़ेगा, 2-3 सीटों पर अभी भी बात फंसी है।

हालांकि औपचारिक ऐलान का इंतजार ना करते हुए महागठबंधन की पार्टियों ने टिकट देने की शुरुआत कर दी है। RJD ने करीब चालीस सीटों पर टिकट सार्वजनिक कर दिये हैं। खुद लालू प्रसाद यादव ने नेताओं को सिंबल देते हुए फोटो जारी किया। हालांकि इसे लेकर पार्टी में कन्फ्यूजन भी हुआ, टिकट वापस लिए गए लेकिन फिर ये तय हुआ कि RJD के टिकट पर वही चुनाव लड़ेंगे।

इस बीच दिल्ली में कांग्रेस इलेक्शन कमेटी की बैठक में 50 नामों पर मुहर लग चुकी है, लिस्ट किसी भी वक्त जारी हो सकती है। मीटिंग के बाद पार्टी ये सफाई देने में भी नहीं चूकी कि महागठबंधन में कोई कन्फ्यूजन नहीं है। हैरानी की बात है कि अब तक महागठबंधन में सबसे मुखर होकर नाराजगी जता रहे मुकेश सहनी पिछले दो दिनों से चुप्पी साधकर बैठे हैं।

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