NDA में सीट बंटवारे पर फंसा पेच,उपेंद्र, चिराग और मांझी बिगाड़ न दे BJP-JDU का खेल

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बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरु हो गई है।इसके बावजूद NDA में अभी तक सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है। शुक्रवार को जब बिहार बीजेपी के नेता दिल्ली में हाईलेवल मीटिंग के लिए पटना से रवाना हो रहे थे तो मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि NDA में सीटों का बंटवारा फाइनल हो चुका है और शनिवार को सीटों का एलान हो जाएगा।लेकिन शनिवार की सुबह से ही एनडीए के सहयोगी नेताओं ने ऐसे बयान दिए जिससे बीजेपी और जेडीयू की मुश्किलें बढ़ती दिख रही है और ऐसा लग रहा है कि गठबंधन में सब कुछ ऑल इज वेल नहीं है।

NDA की प्रमुख सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने शनिवार को पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स जो यह बता रही हैं कि NDA के भीतर बातचीत पर अंतिम सहमति बन गई है और मेरी पार्टी को कुछ सीटें दी जा रही हैं, ये गलत है।बातचीत अभी पूरी तरह से पूरी नहीं हुई है,यह जारी है। बीजेपी नेतृत्व द्वारा दी गई आगे की जानकारी के आधार पर हम दिल्ली जा रहे हैं।बातचीत दिल्ली में होगी; हम आपको बताएंगे कि क्या चर्चा होगी।हम सार्वजनिक रूप से इस पर चर्चा नहीं करेंगे कि हमें कितनी सीटें चाहिए।जहां जरूरत होगी, हम वहां बैठकर चर्चा करेंगे।

NDA में सीट बंटवारे को लेकर असली पेच चिराग पासवान फंसा रहे हैं। वह चाहते है कि उनकी पार्टी को गठबंधन में BJP और JDU के बाद सबसे ज्यादा सीटें मिलीई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि चिराग अपनी पार्टी के लिए 40 से सीटों की मांग कर रहे हैं।इसके पीछे वह यह बात कह रहे हैं कि महागठबंधन में शामिल मुकेश सहनी को आरजेडी 40 सीटों के साथ ही डिप्टी सीएम का पद दे रही है जबकि सहनी के फलहाल 4 भीकुछ नहीं है।वहीं इनके पास लोकसभा के 5 सांसद हैं और उनकी पार्टी की लोकसभा में 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट रहा है,वहीं, जब शनिवार को मीडिया वालों ने चिराग से सवाल किया तो उन्होंने भी गेंद बीजेपी के पाले में डाल दिया और कहा कि फिलहाल उनके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है।जल्द ही NDA के बड़े नेताओं के साथ बैठक करने के बाद वह फैसला लेंगे।

वहीं, बिहार के पूर्व सीएम और मोदी कैबिनेट में मंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को एक्स के जरिये एक पोस्ट शेयर किया है।उस पोस्ट में उन्होंने लिखा था, ‘हो न्याय अगर तो आधा दो, यदि उसमें भी कोई बाधा हो, तो दे दो केवल 15 ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम, HAM वही खुशी से खाएंगे, परिजन पे असि ना उठाएंगे। इस पोस्ट के शेयर होते ही सियासी हलचल बढ़ गई।हालांकि इसके बाद मीडिया से बात करते हुए मांझी ने कहा, कि नड्डा जी अध्यक्ष हैं, वो जो कहेंगे मानना ही पड़ेगा। हम अनुशासनप्रिय लोग हैं और अनुशासन में रहेंगे। इस तरह से NDA में शामिल बड़े नेताओं के बयान से संभावना जताई जा रही है कि NDA में सीट शेयरिंग में पेच फंसा हुआ है।

बीजेपी लगातार कोशिश कर रही है कि सहयोगियों को कम से कम सीटों पर मनाया जाए ताकि बीजेपी और जेडीयू सीधे तौर पर महागठबंधन से दो-दो हाथ करें।इसी वजह से आज शाम को NDA में होने वाले सीटों के बंटवारे को रविवार तक के लिए टाल दिया गया है।।इतनाये की कमान खुद संभाल ली है और तीनों ही नेताओं को आज शाम जेपी नड्डा के आवास पर बैठक के लिए बुलाया गया है।

बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले बताते हैं कि अगर चिराग, कुशवाहा जेडीयू की तिकड़ी को बीजेपी ने नहीं मनाया तो NDA को चुनाव में तगड़ा डेंट लग सकता है।भले ही ये तीनों नेता अपने दम पर बहुत ज्यादा सीटों को जीतने का दम ना रखते हो, लेकिन हराने का दम इनमें जरुर है।इसका अहसास जेडीयू को 2020 के विधानसभा चुनाव में हो चुका है।जब चिराग ने NDA से अलग होकर लड़ा था और जेडीयू के खिलाफ अपने प्रत्याशियों को उतारा था।इसका असर हुआ कि जेडीयू के कई प्रत्याशी उतने ही वोट से हारे जीतने वोट चिराग के प्रत्याशी वोट लेकर आए थे।

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