बांग्लादेश की ताजा हिंसा में लगभग सौ लोगों की मौत ,अनिश्चितकाल के लिए देश में कर्फ्यू लागू 

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न्यूज़ डेस्क 
भारत के पडोसी देश बांग्लादेश की हालत काफी नाजुक होती जा रही है। आरक्षण को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। सड़कों पर उत्तरी जनता जहाँ एक तरफ  सरकार से इस्तीफा मांग रही है वही अब रविवार को देर रात तक सौ लोगों की मौत हिंसा के दौरान हो गई है इस हिंसक वारदात में दरजन भर से ज्यादा पुलिसकर्मियों की भी मौत हुई है। सैकड़ो लोग घायल बताये जा रहे हैं। 

सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के मुद्दे पर हुए बवाल को लेकर सरकार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी रविवार को स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन के बैनर तले आयोजित ‘असहयोग कार्यक्रम’ में भाग लेने पहुंचे थे। अवामी लीग, छात्र लीग और जुबो लीग के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया और फिर दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हो गई।

‘प्रोथोम अलो’ अखबार ने अपनी खबर में बताया कि ‘असहयोग’ आंदोलन को लेकर देश भर में हुई झड़पों, गोलीबारी और जवाबी हमलों में कम से कम 91 लोगों की जान चली गई। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, देशभर में 14 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की खबर है, जिनमें से 13 सिराजगंज के इनायतपुर थाने के थे। अखबार के अनुसार, कोमिला के इलियटगंज में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इसके अलावा 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि आज के विरोध प्रदर्शन में अज्ञात लोग और दक्षिणपंथी इस्लामी शासन तंत्र आंदोलन के कार्यकर्ता शामिल हो गए, जिन्होंने कई प्रमुख राजमार्गों और राजधानी की अंदरूनी सड़कों पर अवरोधक लगा दिए। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थानों, पुलिस चौकियों, सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यालयों और उनके नेताओं के आवासों पर हमला किया तथा कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। 

गृह मंत्रालय ने रविवार शाम छह बजे से देश में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया।सरकारी एजेंसियों ने सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’, ‘मैसेंजर’, ‘व्हॉट्सऐप’ और ‘इंस्टाग्राम’ को बंद करने का आदेश दिया है। 

अखबार ने बताया कि मोबाइल प्रदाताओं को 4जी इंटरनेट सेवा बंद करने का आदेश दिया गया है। इस बीच, प्रधानमंत्री हसीना ने कहा कि विरोध के नाम पर बांग्लादेश में तोड़फोड़ करने वाले लोग छात्र, नहीं बल्कि आतंकवादी हैं और उन्होंने जनता से ऐसे लोगों से सख्ती से निपटने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं देशवासियों से अपील करती हूं कि इन आतंकियों से सख्ती से निपटा जाए।’’

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के सूत्रों के हवाले से अखबार ने खबर में बताया कि हसीना ने गणभवन में सुरक्षा मामलों की राष्ट्रीय समिति की बैठक बुलाई। बैठक में सेना, नौसेना, वायुसेना, पुलिस, रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी), बांग्लादेश सीमा गार्ड (बीजीबी) के प्रमुखों और अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। देशभर में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सोमवार, मंगलवार और बुधवार को तीन दिवसीय सामान्य अवकाश की घोषणा की है।

अखबार ने बताया कि नरसिंगडी में सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में अवामी लीग के छह नेताओं और कार्यकर्ताओं को पीट-पीटकर मार दिया गया और कई अन्य घायल हो गए। राजधानी में प्रदर्शनकारी ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल से चार लोगों के शव अपने साथ ले गए। खबर के अनुसार, प्रदर्शनकारी चारों शवों को लेकर सेंट्रल शहीद मीनार पहुंचे और सरकार विरोधी नारे लगाए।

वहीं, एक संबंधित घटनाक्रम में सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के एक समूह ने रविवार को सरकार से सशस्त्र बलों को सड़कों से हटाकर बैरकों में वापस भेजने का आग्रह किया। पीएम हसीना की सरकार में सेना प्रमुख के रूप में काम कर चुके इकबाल करीम ने कहा, ‘‘हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह मौजूदा हालात के समाधान के लिए राजनीतिक पहल करे। हमारे सशस्त्र बलों को ऐसे अभियान में उलझाकर उनकी अच्छी प्रतिष्ठा को नष्ट न करें।’’

विरोध प्रदर्शन के चलते ढाका की ज्यादातर दुकानें और मॉल बंद रहे। सैकड़ों छात्र और कामकाजी लोग ढाका के शाहबाग में एकत्र हो गए हैं, जिससे यातायात जाम हो गया।

एक खबर के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग की और आरक्षण में सुधार को लेकर हाल में हुए विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए। प्रदर्शनकारी असहयोग आंदोलन के पहले दिन राजधानी के साइंस लैब चौराहे पर भी एकत्र हुए और उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाए।

‘डेली स्टार’ के अनुसार, रविवार को बंगबंधु शेख मुजीब मेडिकल यूनिवर्सिटी (बीएसएमएमयू) में अज्ञात लोगों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। खबर के अनुसार, लाठी-डंडे लिए लोगों को अस्पताल परिसर में निजी कार, एम्बुलेंस, मोटरसाइकिलों और बसों में तोड़फोड़ करते देखा गया, जिससे मरीजों, तीमारदारों, चिकित्सकों और अन्य कर्मियों में भय पैदा हो गया। प्रदर्शनकारियों ने हसीना के वार्ता के निमंत्रण को खारिज कर दिया और सरकार के इस्तीफे की मांग की।

प्रदर्शन के समन्वयकों ने स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और मदरसों के छात्रों के साथ-साथ श्रमिकों, पेशेवरों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और अन्य आम लोगों से विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का आह्वान किया। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के समन्वयक नाहिद इस्लाम ने घोषणा की कि वे अपनी एक सूत्री मांग को लेकर सोमवार को प्रदर्शन और सामूहिक धरना देंगे।उन्होंने एक बयान में कहा कि सोमवार को वे आरक्षण सुधार आंदोलन के दौरान हाल ही में देशभर में मारे गए लोगों की याद में शहीद स्मारक पट्टिकाओं का अनावरण करेंगे।

बांग्लादेश में हाल में पुलिस और मुख्य रूप से छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें देखने को मिली थीं जिसमें 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। प्रदर्शनकारी विवादास्पद आरक्षण प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे थे जिसके तहत 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वाले लड़ाकों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था।

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