न्यूज डेस्क
हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत महत्व माना जाता है। इस दिन पूजा का विशेष विधान है। पंचांग के अनुसार, साल में कुल 12 अमावस्या तिथियां पड़ती हैं, इन्हीं में से एक है ज्येष्ठ माह की अमावस्या। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन भगवान शनि देव की पूजा का विधान है और साथ ही पितरों का भी तर्पण किया जाता है। इस दिन पवित्र नदी गंगा में स्नान करने के बाद दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार ज्येष्ठ अमावस्या पर शिववास होगा और ऐसे में यदि इस दिन भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया जाए तो वह प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद देंगे।
इस साल ज्येष्ठ अमावस्या का 6 जून 2024 को है और इस दिन पितरों का तर्पण करना फलदायी माना गया है। मान्यता है कि अगर आप मोक्ष की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो इस दिन गंगा चालीसा का पाठ अवश्य करें। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनिदेव की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 6 जून को शमा 6 बजे से लेकर रात 9 बजकर 49 मिनट रहने वाला है। इस मुहूर्त में शनिदेव की पूजा के साथ ही शनि चालीसा का पाठ भी करें।
ज्येष्ठ अमावस्या पर ऐसे करें पितरों का तर्पण
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पितरों का स्मरण करें। फिर काले तिल, सफेद फूल और कुश से पितरों का तर्पण करें। मान्यता है कि इससे पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। यदि संभव हो तो घर में ब्राह्मण को बुलाकर पितरों तर्पण करवाएं। पितरों को खीर का भोग लगाएं और खीर में इलायची, केशर और शहद जरूर मिलाएं। इसके अलावा गोबर से बने उपले से अग्यारी करें और पितरों से क्षमायाचना करें।
यदि आप पितृ दोष से परेशान हैं तो सुबह स्नान आदि करनें के बाद पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और बिगड़े काम बनने लगते हैं। कहते हैं कि पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। साथ ही पितर भी इस पेड़ में वास करते हैं।
ज्येष्ठ अमावस्या 2024 महत्व
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितृ तर्पण करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे पितृ दोष दूर होता है और पितरों की कृपा होती है। इसके अलावा, शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है और शनिदेव की कृपा से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

