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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का खुलासा, आरएसएस की जगह अब बीजेपी खुद लेती है हर निर्णय

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को तीसरी बार सत्ता में ना आने देने के लिए विभिन्न विरोधी राजनीतिक दलों के गठबंधन इंडिया एलायंस के हर घटक दल इस समय अपने चुनावी भाषणों में यह चर्चा करते हैं की बीजेपी को आरएसएस दिशा निर्देश देती है, जो एक हिंदुत्व वादी पार्टी है। आरएसएस को आरक्षण विरोधी बताते हुए विपक्षी गठबंधन इंडिया एलायंस के नेता हर चुनावी सभा में यह कहती है कि भारतीय जनता पार्टी 400 का लक्ष्य इसलिए प्राप्त करना चाहती है ताकि वह संविधान में संशोधन कर आरक्षण को समाप्त कर सके। लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बीजेपी द्वारा अब आरएसएस का समर्थन नहीं लेने की बात कह कर विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देने का प्रयास किया है। जेपी नड्डा ने कहा की आरएसएस एक वैचारिक संस्था है और भारतीय जनता पार्टी एक राजनीतिक संस्था है। दोनों के क्रियाकलाप और कार्य विधि अलग-अलग हैं।

पूर्व की स्थिति से बहुत बदल चुकी है बीजेपी

एक मीडिया इंटरव्यू में पूछे गए सवाल को लेकर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय के बीजेपी और एक मौजूदा समय के बीजेपी में काफी कुछ बदल चुका है।इसी कड़ी में आरएसएस की उपस्थिति भी बदल गई है। पहले हम इतनी बड़ी पार्टी नहीं थे और अक्षम थे। हमें आरएसएस की जरूरत पड़ती थी, लेकिन आज हम काफी आगे बढ़ चुके हैं और अकेले दम पर आगे बढ़ने में सक्षम हैं।

वो वैचारिक रूप से अपना काम करते हैं और हम राजनीतिक रूप से

एक दूसरे सवाल कि क्या बीजेपी को अब आरएसएस के समर्थन की जरूरत नहीं है के जवाब में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि देखिए, बीजेपी पार्टी बड़ी हो गई है और सभी को अपने-अपने कर्तव्य के साथ भूमिकाएं मिल चुकी हैं।आरएसएस एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है और हम एक राजनीतिक संगठन हैं। यह जरूरत का सवाल नहीं है। वैचारिक मोर्चा होने के कारण आरएसएस अपने तरीके से अपना काम करता हैं और राजनीतिक दल होने के नाते बीजेपीअपना काम अपने रूप से करते हैं। हर राजनीतिक दलों को यही करना भी चाहिए।

फिलहाल बीजेपी की प्राथमिकता

हिंदुत्ववादी संगठन विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस की प्राथमिकता में भले ही राम मंदिर निर्माण के बाद मथुरा और काशी भी शामिल हो सकता है ,लेकिन बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने बताया कि मथुरा और काशी में विवादित स्थलों पर मंदिर बनाने की बीजेपी की कोई योजना नहीं है।उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास ऐसा कोई विचार, योजना या इच्छा भी नहीं है।उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी का सिस्टम इस तरह से काम करता है कि पार्टी की विचार प्रक्रिया संसदीय बोर्ड में चर्चा से तय होती है, फिर यह राष्ट्रीय परिषद के पास जाती है जो इसका समर्थन करती है।उन्होंने बताया कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  फैसला किया है कि मथुरा और काशी से इतर  पार्टी का ध्यान फिलहाल गरीबों, शोषितों, दलितों, महिलाओं, युवाओं, किसानों और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों पर होगा। इन वर्गों को मुख्यधारा में लाया जाना चाहिए और सशक्त बनाया जाना चाहिए.।हमें उन्हें मजबूत करना होगा।

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