स्मार्ट सिटी और आदर्श गांव के नारे के बीच बिहार ,यूपी और झारखंड की गरीबी का सच

0
187

अखिलेश अखिल
यह गजब का देश है और अजब है यहाँ की सरकार। चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र कुछ और होते हैं और सरकार बनते ही सरकार की प्राथमिकता कुछ और हो जाती है। प्राथमिकता भी ऐसी जो कभी पूरी न हो और हो भी तो योजनाओं की लूट हो जाए। तभी पांच साल होते-होते नेताओं की संपत्ति दुगुनी-तिगुनी हो जाती है और नेताओं के सहभागी नौकरशाह के घरों से नोटों की गड्डियां बाहर निकलने लगती है।

पीएम मोदी जब 2014 में सत्ता में आये तो लगा कि देश के दिन बहुर जायेंगे और देश का कोना-कोना चमक जायेगा। गरीबी दूर होगी,बेरोजगारी ख़त्म हो जाएगी,महंगाई ख़त्म होगी,डॉलर की तुलना में रूपया कुलांचे मारेगा और असमानता की खाई समाप्त हो जाएगी। पुरे देश में सरकार के आगमन पर कीर्तन भजन होने लगे थे। सरकार ने ऐलान किया कि देश अब बदल जायेगा। स्मार्ट सिटी तैयार होगा जहाँ सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी। आदर्श गांव होंगे जहां हर सुविधा होगी। सांसदों के जिम्मे आदर्श गांव सौपे गए। लेकिन आज तक ये योजना पूरी नहीं हो सकी। अब कोई इस योजना पर बहस भी नहीं करता। स्मार्ट सिटी की कहानी कहाँ चली गई कोई जनता तक नहीं। और भी कई ऐसी योजनाएं शुरू हुई जिसमे आँखे चौंधियाँ वाली बाते थी ,लेकिन सब ठंढे बस्ते में दबते चले गए।

फिर 2021 में भारत सरकार के नीति आयोग की एक रिपोर्ट सामने आयी जिसमे गरीब राज्यों की  सूची जारी की गई। गरीब जिलों को चिन्हित किया गया और अब प्रखंडों की बात की जाने लगी है। नीति आयोग के मुताबिक बहुआयामी गरीबी सूचकांक यानी एमपीआई के अनुसार बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश देश के सबसे गरीब राज्यों के रूप में सामने आए। सूचकांक के अनुसार, बिहार की 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब है। वहीं झारखंड में 42.16 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 37.79 प्रतिशत आबादी गरीब है। सूचकांक में मध्य प्रदेश (36.65 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है, जबकि मेघालय (32.67 प्रतिशत) पांचवें स्थान पर है।

बता दें कि बहुआयामी गरीबी सूचकांक में मुख्य रूप से परिवारकी आर्थिक हालात और अभाव की स्थिति को आंका जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है, भारत के एमपीआई में तीन समान आयामों- स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर का मूल्यांकन किया जाता है। इसका आकलन पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, प्रसवपूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पीने के पानी, बिजली, आवास, संपत्ति तथा बैंक खाते जैसे 12 संकेतकों के जरिये किया जाता है।

बिहार की आधी से ज्यादा आबादी गरीबी में अपना जीवन आज भी जीने को मजबूर है। आजादी के 75 साल पूरे होने को हैं लेकिन फिलहाल गरीबी कम होती नहीं दिख रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और बेहतर जीवन जीने के दावों की भी पोल खुल रही है। लिस्ट में जिलों के आंकड़ें भी शामिल किए गए हैं, जिनमें यूपी के दो और एमपी का एक जिला सर्वाधिक गरीब जिले घोषित किए गए हैं। यही हाल यूपी की भी है और  झारखंड की भी। यूपी के श्रावस्ती और बहराइच सबसे ज्यादा गरीब जिले हैं जहां की 70 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रही है। तो झारखंड रांची समेत लगभग सभी जिले गरीबी में जी रहे हैं।

तो सवाल है कि अब तक इन राज्यों और जिलों की गरीबी क्यों कम नहीं हुई? जब इन राज्यों में बीजेपी की सरकार ही लगातार चलती रही है तो गरीबी ख़त्म क्यों नहीं हुई ? इसका जबाब सरकार के पास नहीं है। हर साल चुनाव में जीत के लिए तिकड़म की राजनीति तो खूब होती है लेकिन गरीबी दूर करने की बात नारो तक ही सीमित रहती है। बिहार में बीजेपी के साथ मिलकर नीतीश कुमार लम्बे समय तक राज चलाते रहे,बिहार गरीबी से उठ न सका। यूपी में बीजेपी की सत्ता कायम है लेकिन गरीबी मुँह बाए खड़ी है। यूपी का बहराइच और श्रावस्ती आज भी बदहाली में है। कई चमचमाती योजनाए वहाँ दिख सकती है लेकिन गरीबी का प्रदर्शन लज्जित करने के लिए काफी है।

इधर कोरोना काल से सरकार ने गरीबो को पांच किलो अनाज फ्री में देने की योजना शुरू की। अब तक यह योजना जारी है। सरकार पीठ थोक कर कहती है कि देश के 80 करोड़ लोगों का वह पेट भर रही है। यह सच भी है। क्या सरकार मानेगी कि अब देश में गरीबो की आबादी 80 करोड़ तक पहुँच गई है जो पहले 26 फीसदी तक सीमित थी?

यही योजना अब सरकार के लिए रामबाण बनी हुई है। इसी अनाज योजना का लाभ बीजेपी चुनावी खेल में मददगार है। विपक्ष चाहे कुछ भी कर ले मुफ्त की योजना जनता को खूब भाती है। जिस दिन ये योजना ख़त्म होगी उसी समय से बीजेपी की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी। तभी बीजेपी इस मुफ्त अनाज योजना को लगातर बढ़ाती जा रही है। लोकसभा चुनाव तक यह योजना चल सकती है और इसके साथ ही अब कुछ नकदी की व्यवस्था भी सरकार कर दे तो फिर चुनावी महफ़िल में विपक्ष की क्या औकात रह जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here