न्यूज़ डेस्क
गुजरात में कल चुनाव है लेकिन सभी लोगों की नज़ारे इस बात पर तिकी हुई है कि क्या इस बार के चुनाव में कांग्रेस को की बड़ी सफलता मिलेगी ? हालांकि कांग्रेस ने बड़े अनोखे अंदाज में इस बार गुजरात में प्रचार किया है।
लेकिन बीजेपी का गढ़ होने की वजह से जानकार भी कह रहे हैं कि इस बार भी बीजेपी को बड़ी सफलता यही से मिल सकती है। लेकिन कुछ जानकार यही भी कह रहे हैं कि संभव है कि बीजेपी को भले ही अन्य राज्यों की अपेक्षा गुजरात में सफलता कुछ ज्यादा ही मिले लेकिन कई मंत्रियों की प्रतिष्ठा इस बार दाव पर लगी हुई है।
लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में गुजरात के 25 सीटों पर मतदान होगा। एक सीट सूरत में बीजेपी के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, हालांकि इस पर भी काफी विवाद हुआ। विपक्षी दलों ने धांधली के आरोप लगाए हैं। बीजेपी ने इस बार अपने 14 मौजूदा सांसदों के टिकट काट दिए हैं। इन सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया है। 12 सांसद दोबारा टिकट पाने में कामयाब रहे हैं।
बीजेपी की ओर से गृहमंत्री अमित शाह गांधीनगर से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर तीस सालों से बीजेपी का कब्जा है। बीजेपी के दिग्गज नेता 1999 से यहां से जीतते आए हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में पहली बार अमित शाह ने यहां से चुनाव लड़ा था। वहीं, कांग्रेस ने इस सीट से पार्टी की सचिव सोनल रमणभाई पटेल को मैदान में उतारा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया महात्मा गांधी के जन्मस्थली पोरबंदर से चुनाव लड़ रहे हैं। पेशे से वेटरनरी डॉक्टर मंडाविया गुजरात से दो बार के राज्यसभा सांसद हैं। इस सीट पर पाटीदार समुदाय का खासा प्रभाव है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक और पाटीदार नेता ललित वसोया को अपना उम्मीदवार बनाया है। पाटीदार आरक्षण आंदोलन में सक्रीय रहे वसोया 2019 में भी कांग्रेस के प्रत्याशी थे।
आप ने भरूच और भावनगर की सीटों पर अपने मौजूदा विधायकों चैतर वसावा और उमेश मकवाणा को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री परशोत्तम रूपाला के खिलाफ परेश धानानी को मैदान में उतारा है। गुजरात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा को केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राजकोट लोकसभा उम्मीदवार परषोत्तम रूपाला के खिलाफ महत्वपूर्ण क्षत्रिय समुदाय के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जो कि समुदाय के खिलाफ उनकी टिप्पणियों पर है।

