न्यूज़ डेस्क
एक तरफ बीजेपी चार सौ पार का दावा कर रही है जबकि दूसरी तरफ देश के 21 करोड़ युवा अपनी बेवसी ,लाचारी और बेरोजगारी को लेकर मर्माहित है। सामने लोकसभा का चुनाव है और यह चुनाव युवाओं के लिए भी काफी अहम् है। ऐसे में अब इस बात की चर्चा भी की जा रही है कि क्या देश के युवा इस बार कोई करिश्मा कर पाएंगे ?
बता दें कि इस बार के चुनाव में 97 करोड़ मतदाता अपना मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। सबसे अहम बात यह है कि चुनाव में पहली बार वोट देने वाले यानी 18-19 साल के मतदाताओं की संख्या 1.82 करोड़ है। इसके अलावा 20 से 29 साल के युवा वोटरों की संख्या 19.74 करोड़ है। ये युवा मतदाता किसी भी हार जीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अभी हाल में ही देश के कुछ युवाओं ने जो चुनाव को लेकर प्रतिक्रिया दी है उसे जानने की बहुत जरुरी है। मुंबई यूनिवर्सिटी के छात्र ने कहा कि वह सरकार के सशक्त हिंदू राष्ट्रवाद के परिणामस्वरूप “पूरे भारत में दिख रहे सांप्रदायिक मनमुटाव” से नाखुश हैं।
ऐसा कहा जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने भारत की बहुसंख्यक हिंदू आस्था को राजनीतिक जीवन में सबसे आगे खड़ा कर दिया है। इससे मुसलमानों और दूसरे अल्पसंख्यकों के मन में धर्मनिरपेक्ष देश में अपने भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
फिर भी, भारत की अर्थव्यवस्था बहुत तेज गति से बढ़ रही है और वह 2022 में पूर्व औपनिवेशिक शासक ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई. धोत्रे चाहते हैं कि मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी फिर से जीत हासिल करे।
तमिलनाडु की रहने वाली 20 साल की त्रिशालिनी द्वारकनाथ सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं और वह भारत के आर्थिक बदलावों का प्रतीक हैं। अब वह अपने गृह राज्य से टेक हब बेंगलुरु ट्रांसफर ले रही हैं। पहली बार वोट देने जा रही द्वारकनाथ कहती हैं, “मैं भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा बनने और पहली बार अपनी राय जाहिर करने को लेकर उत्साहित हूं। मुझे खुशी है कि मेरी आवाज मायने रखती है।”
वह मोदी सरकार के कार्यकाल में हासिल उपलब्धियों की तारीफ करती हैं लेकिन कहती हैं कि लाखों बेरोजगार युवा भारतीयों को काम खोजने में मदद करने के लिए और अधिक कोशिश करने की जरूरत है।
पिछले साल अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 8.4 फीसदी थी जबकि, सितंबर तिमाही में भारत ने 7.6 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का अनुमान है कि 2022 में देश में 29 प्रतिशत यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट बेरोजगार थे। यह दर उन लोगों की तुलना में लगभग नौ गुना अधिक है जिनके पास कोई डिप्लोमा नहीं है और आमतौर पर कम वेतन वाली नौकरियों या कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करते हैं।
पहली बार वोट डालने वाले 22 वर्षीय गुरप्रताप सिंह निश्नित तौर पर बीजेपी को सपोर्ट नहीं करेंगे। गुरप्रताप एक किसान हैं और उनका नाता पंजाब से है। साल 2021 में पंजाब के किसानों ने तीन कृषि कानून के खिलाफ साल भर विरोध प्रदर्शन किया था जिसके बाद सरकार ने उन तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया था। इसे एक तरह से प्रधानमंत्री मोदी की हार के तौर पर देखा गया।
देश के किसान चुनाव के दौरान अहम भूमिका निभाते हैं और उनका वोट सभी पार्टियों के लिए बहुत मायने रखता है। गुरप्रताप ने कहा, “जो सरकार किसानों, युवाओं के बारे में सोचती है…वही सरकार सत्ता में आनी चाहिए। ” उन्होंने कहा कि बीजेपी उस टेस्ट में फेल हो चुकी है।
देश की करीब 1.4 अरब आबादी अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आती है, जिसमें ट्रांसजेंडर समुदाय भी शामिल है। इनकी संख्या कई लाख होने का अनुमान है. हिंदू आस्था में “तीसरे लिंग” के कई संदर्भ हैं।
2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर को पुरूष या महिला के बजाए एक तीसरे लिंग का दर्जा दिया था। कोर्ट ने अपने ऐतिसाहिक आदेश में सरकार से कहा था कि ट्रांसजेंडर को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा समुदाय माना जाए और उन्हें नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण दिया जाए। इससे भारत के करीब तीस लाख से अधिक ट्रांसजेंडर को फायदा हुआ और उन्हें भी आम नागरिकों की तरह हर अधिकार मिलने लगे।
चुनाव आयोग के मुताबिक देश में इस वक्त 48,044 थर्ड जेंडर मतदाता पंजीकृत है। वहीं साल 2019 में यह संख्या 39,075 थीं।

