समय से पहले माफिया डॉन अरुण गवली को मिलेगी जेल से रिहाई !

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न्यूज़ डेस्क
मौजूदा समय में महाराष्ट्र से एक बड़ी खबर आ रही है। इस खबर से महाराष्ट्र में हलचल है। जानकारी के मुताबिक़ माफिया डॉन अरुण गवली की नागपुर सेंट्रल जिउल से रिहाई होने वाली है। यह रिहाई समय से पहले की जाने की बात है। गवली आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। गवली की रिहाई को चुनाव से जोड़कलार भी देखा जा रहा है। आज ही  हाईकोर्ट ने गवली की रिहाई की याचिका पर आदेश जारी किया है।    

न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति वृषाली जोशी की खंडपीठ ने अरुण गवली की याचिका को स्वीकार कर लिया है। उनके वकील मीर नगमान अली ने बताया, गवली का आवेदन पहले इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि सरकार की एक अधिसूचना विशेष रूप से मकोका के तहत दोषी को नीति के लाभ से बाहर रखती है। उन्होंने तर्क दिया कि 2006 की अधिसूचना यह स्पष्ट करती है कि एनडीपीएस, टाडा, एमपीडीए आदि कानूनों के तहत दोषी 2006 के नीतिगत लाभों के हकदार नहीं हैं

 गवली ने अपनी याचिका में कहा कि वो अब 69 साल का हो गया है और सरकार के ही एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जिन कैदियों की 14 साल की सजा हो चुकी है और उम्र 65 साल को पार कर गई है, उनको रिहा किया जा सकता है। वकील अली ने कहा, दोनों पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर गवली की रिहाई पर निर्णय लेने का निर्देश दिया, जिससे जेल से उसकी समय से पहले रिहाई का रास्ता साफ हो गया। उसने 16 साल जेल में बिताए हैं।

मूल रूप से मुंबई के रहने वाले और दगड़ी चॉल के डॉन के रूप में खूंखार 69 वर्षीय अरुण गवली 2004 से 2009 तक विधायक भी रहा है। उसे 2006 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर मुकदमा चला, दोषी पाया गया और 2012 में शिव सेना नेता कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

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