साल 2022 महिला आंदोलनों का साल रहा है. बीते 12 महीनों में महिला अधिकारों को लेकर दुनियाभर में कई ऐसे फैसले हुए जो हमें जागरूक करते हैं. चौंकाते हैं और यह भी संकेत देते हैं कि आधी आबादी को दबाना अब मुमकिन नहीं है. कहा जा सकता है कि महिलाओं के मामले में भारत समेत पूरी दुनिया के लिए साल 2022 काफी उलटफेर वाला रहा. कहीं अबॉर्शन कानून पर प्रतिबंध लगा तो कहीं मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वालों को लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ा लेकिन आन्दोलन नहीं रुके. ईरानी महिलाओं का हिजाब के विरोध में संघर्ष पूरी दुनिया में छा गया और वहां की सरकार को झुकना पड़ा.
चलिए आपको बताते हैं साल 2022 में होने वाले महिला आंदोलन और बड़े फैसले
पहला
कोलंबिया के कोर्ट ने इस साल फरवरी में प्रेग्नेंसी के 24 हफ्तों के अंदर अबॉर्शन कराने को लीगल घोषित कर दिया. इससे पहले गर्भवती महिला को केवल जान का खतरा होने पर ही अबॉर्शन का हक था. इससे कुछ साल पहले मेक्सिको और अर्जेंटीना में भी महिलाओं को अबॉर्शन करवाने का हक दिया गया था.
दूसरा
भारत में सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने अबॉर्शन का अधिकार देने वाला ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इसके मुताबिक मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत किसी भी महिला को 22 से 24 सप्ताह तक अबॉर्शन का हक है. चाहे महिला विवाहित हो या अविवाहित.
तीसरा
स्पेन में मई 2022 में यौन हिंसा रोकने और कार्रवाई आसान बनाने के लिए संसद में एक बिल पेश हुआ. इसे ओनली यस मीन्स यस कहा गया. इस बिल में पीरियड में दर्द से जूझ रही महिलाओं को पेड लीव देने का प्रस्ताव था. जिसे संसद ने न केवल मंजूर किया बल्कि स्पेन, यूरोप का पहला देश बन गया जिसने महिलाओं के हक में ये ऐतिहासिक फैसला लिया.
चौथा
रूस से युद्ध के बीच यूक्रेन ने ‘इस्तांबुल कन्वेंशन’ को मान्यता दी. इसे यूक्रेन में महिलाओं के अधिकारों के लिए ऐतिहासिक जीत माना गया. साथ ही यह कदम रूस के साथ चल रहे युद्ध के दौरान यूरोप में देश के एकीकरण में अहम कदम बना.
पांचवां
ईरान में 16 सितंबर को महसा अमीनी की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद देश भर में हिजाब विरोधी प्रदर्शन हुए. इस्लामिक कानून लागू करने के खिलाफ आंदोलन कर महिलाएं आजादी की मांग कर रही हैं. तीखे आंदोलन के बीच अब सरकार का रुख नर्म हुआ और वह इस कानून की समीक्षा कर रही है. उम्मीद की जा रही है कि ईरानी महिलाओं का यह आंदोलन मुकाम पर पहुंचेगा. इस हिजाब मूवमेंट को टाइम्स ने 2022 हिरोज ऑफ द ईयर के तौर पर चुना.
छठा
कई देशों में पहली बार महिलाएं राजनीति का प्रमुख चेहरा बनकर उभरीं. होंडुरास में महिला राष्ट्रपति चुनी गई शियोमारा कास्त्रो ने जनवरी 2022 में पदभार संभाला. हंगरी में कटालिन नोवाक देश की पहली महिला और सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति बनीं.
सातवां
बीसीसीआई ने भारत की महिला क्रिकेटरों को पुरुषों के बराबर वेतन देने की घोषणा के साथ ही वर्षों से चल रहा भेदभाव खत्म किया. इस फैसले के बाद भारत में महिला क्रिकेटरों की सैलरी पुरुष खिलाड़ियों के समान ही होगी. क्रिकेट में लैंगिग भेदभाव को दूर करने वाला यह फैसला ऐतिहासिक रहा.

