कौन हैं जस्टिस बीवी नागरत्ना, 24 घंटे में दो बड़े फैसलों पर दी अलग राय, 2027 में होंगी CJI !

0
149

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार और मंगलवार को दो बड़े फैसले सुनाए। पहला फैसला केंद्र सरकार द्वारा 2016 में की गयी नोटबंदी को लेकर और दूसरा मंत्री,सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों के बोलने की आजादी पर। इन दोनों फैसलों में एक समानता देखी गयी,जजों की खंडपीठ में से एक जज ने अलग निर्णय दिया। पिछले चौबीस घंटे में दो फैसलों पर अलग राय रख जस्टिस नागरत्ना ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इन दोनों फैसलों की वजह से जस्टिस नागरत्ना चर्चाओं में हैं।

कौन हैं बी.वी. नागरत्ना?

बी.वी.नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रह चुके ईएस वेंकटरमैया की बेटी हैं। उनका जन्म 30 अक्टूबर 1962 को हुआ था। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के फेकल्टी ऑफ लॉ से एलएलबी की पढ़ाई की है। 1987 में उन्होंने बेंगलुरु में एक एडवोकेट के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की।

20 साल तक वकालत करने के बाद 2008 में उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट में एडीशनल जज बनाया गया। इसके दो साल बाद उन्हें स्थायी जज के तौर पर नियुक्त कर दिया गया। 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बी.वी. नागरत्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया था। जस्टिस नागरत्ना 25 सितंबर, 2027 को भारत की चीफ जस्टिस बन सकती हैं। उनका कार्यकाल एक महीने से अधिक का होगा। वह भारत की 54वीं चीफ जस्टिस बन सकती हैं।

जस्टिस बीवी नागरत्ना के प्रमुख फैसले

जस्टिस नागरत्ना के प्रमुख फैसलों में से एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संचालन से जुड़ा हुआ है। 2012 में दिए गए अपने एक फैसले में उन्होंने कहा था कि किसी भी मीडिया चैनल के लिए सच पर आधारित सूचना दिखाना एक प्रमुख काम है। लेकिन सनसनीखेज के रूप में दिखाई जाने वालीं ब्रेकिंग न्यूज, फ्लैश न्यूज, या किसी भी ऐसी खबर पर अंकुश लगाना चाहिए। अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस नागरत्ना ने केंद्र सरकार से एक स्वायत्त और वैधानिक तंत्र बनाने की बात कही थी।

2019 में दिए गए एक और फैसले में जस्टिस नागरत्ना ने कहा था कि मंदिर किसी भी तरह का व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं है। इसलिए इसके तहत कर्मचारी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के अंतर्गत ग्रेच्युटी के हकदार नहीं हैं। लेकिन जस्टिस ने ये कहा था कि कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थानों और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम के तहत ये फायदा उठाया जा सकता है।

2020 में तलाक के एक मामले में भी महिला सशक्तिकरण पर जस्टिस बीवी नागरत्ना ने जो टिप्पणी की थी, वो खूब सुर्खियों में रही। उन्होंने कहा था कि लोग हमेशा महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, लेकिन समाज को नहीं पता कि सशक्त महिलाओं संग कैसा व्यवहार करना चाहिए। माता-पिता भी अपने बेटों को नहीं सिखाते कि एक सशक्त महिला के साथ कैसा बर्ताव रखना चाहिए। लड़कों के साथ यही सबसे बड़ी समस्या है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here