एसपी और कांग्रेस में बिगड़ते-बिगड़ते बन गई बात, प्रियंका गांधी ने निभाया अहम रोल

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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में चुनावी गठबंधन को लेकर अब बात बन गई है। लोकसभा चुनाव में अब दोनों पार्टियों उत्तर प्रदेश में साथ-साथ मिलकर चुनाव लड़ने जा रही हैं। दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर लंबे समय से बात चल रही थी, लेकिन सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन पा रही थी।क्षण- क्षण बात बिगड़ती हुई दिख रही थी,लेकिन आखिरकार दोनों के बीच साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात बन गई है।

एसपी -कांग्रेस गठबंधन में प्रियंका गांधी की अहम भूमिका

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बिगड़ी बात को बनाने में प्रियंका गांधी वाड्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस मामले में प्रियंका गांधी वाड्रा ने पहले राहुल गांधी के साथ उत्तर प्रदेश गठबंधन को लेकर चर्चा की।राहुल गांधी के साथ चर्चा के बाद प्रियंका गांधी ने अखिलेश यादव को फोन लगाकर कर गठबंधन के संबंध में बातचीत शुरू की ।प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव के बीच हुए इस टेलिफोनिक बातचीत के दौरान ही गठबंधन की बात आगे बढ़ी।इसके लिए कांग्रेस ने मुरादाबाद सीट की मांग छोड़ दी और उसकी जगह सीतापुर,श्रावस्ती और वाराणसी सीट की मांग की।

प्रियंका ने अखिलेश को किया था फोन

शुरुआत में अखिलेश यादव ने कांग्रेस को 11 सीटों का ऑफर दिया था। इसपर बात नहीं बनने के बाद ,समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कांग्रेस को 17 सीटों का ऑफर देते हुए इसे अंतिम ऑफर करार दिया था ।लेकिन बात तब भी नहीं बन पाई थी। दरअसल कांग्रेस मुरादाबाद सीट मांग रही थी ।2019 ईस्वी में मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी जीती थी, इस वजह से समाजवादी पार्टी इस सीट को छोड़ना नहीं चाहती थी। इस वजह से गठबंधन की बात पटरी से उतरने लगी थी।एक समय तो ऐसा लग रहा था कि अब उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो सकेगा। इसके बाद प्रियंका गांधी ने गठबंधन को लेकर मोर्चा संभाला।उन्होंने समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव को फोन लगाकर गठबंधन को लेकर बात की और तब जाकर दोनों पार्टियों के बीच सहमति बन पाई।

इन सीटों पर लड़ सकती है कांग्रेस

प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस अमेठी, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी, महाराजगंज, देवरिया ,बांसगांव, सीतापुर, अमरोहा, बुलंदशहर,गाजियाबाद, कानपुर,झांसी, बाराबंकी, फतेहपुर सिकरी, सहारनपुर और मथुरा से चुनाव लड़ सकती है।

पूर्व के चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन तथा बिना गठबंधन का प्रदर्शन

इससे पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के वक्त साथ आए थे।तब इस गठबंधन के लिए ‘ उत्तर प्रदेश के लड़के’ का नारा दिया गया था।हालांकि चुनाव में इस गठबंधन को बुरी तरह से हार मिली थी।समाजवादी पार्टी ने 47 और कांग्रेस ने सिर्फ 7 सीट ही जीती थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।तब यहां की 80 में से महज 5 सीट ही समाजवादी पार्टी जीत सकी थी और कांग्रेस के खाते में महज एक सीट आई थी।

अंत भला तो सब भला

आज से पहले तक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को लेकर समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव गठबंधन होने के बाद ही राहुल गांधी के नेतृत्व वाली भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल होंगे जैसी बात कर रहे थे,यहां तक कि वे इसके टूट जाने तक की भी चर्चा करने लगे थे। लेकिन अब सब कुछ बदल गया। पत्रकारों के द्वारा इस संदर्भ में पूछे गए सवाल को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि अंत भला तो सब भला! कोई विवाद की बात नहीं है। अब गठबंधन होगा।

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