राज्यसभा में चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा वाले मामले पर गहमागहमी का माहौल रहा।विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर आपत्ति जताते हुए राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि इस भाषा का प्रयोग ना करें। मैं चौधरी चरण सिंह का अपमान बर्दाश्त नहीं करूंगा। वह बेदाग सार्वजनिक जीवन,बेदाग अखंडता और किसानों के प्रति वचनबद्धता के लिए खड़े हैं। मैंने उन्हें अपनी आंखों से देखा है।
किस नियम के तहत बोलने दिया गया
सत्ता पक्ष की ओर से जब जयंत चौधरी अपनी बात रख रहे थे, तब कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि उन्हें किस नियम के तहत बोलने का अवसर दिया गया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जिन भी शख्सियतों को भारत रत्न देने की घोषणा की गई है, उसपर पर कोई वाद- विवाद नहीं है। लेकिन किस नियम के अधीन जयंत चौधरी को बोलने का मौका दिया गया यह तो सदस्यों को बताया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्य नियमों के अधीन भी मुद्दा उठाना चाहते हैं तो उन्हें चुप करा दिया जाता है।
धनखड़ ने गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे उन्हें बहुत ठेस पहुंची है
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के अन्य सदस्यों द्वारा आसन के व्यवहार पर सवाल उठाए जाने पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें इस व्यवहार से बहुत गहरी ठेस पहुंची है। सभापति ने सदन को बताया कि जयंत चौधरी ने सुबह उन्हें एक पत्र लिखा था कि वह चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा पर सदन में कुछ बोलना चाहते हैं ।उन्होंने कहा कि जयंत चौधरी चरण सिंह के पोते हैं, इसलिए उन्होंने उन्हें बोलने का मौका दिया। इस मुद्दे पर सदन में कुछ देर तक हंगामा का माहौल बना रहा।
असली धरतीपुत्र का सम्मान कैसे रख पाएंगे
राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि सदन की कार्रवाई के दौरान विपक्षी सदस्यों के दुर्व्यवहार से वे बहुत दुखी हैं।उन्होंने कहा कि हम चौधरी चरण सिंह जैसी शख्सियत को किसी गठबंधन के बनने और टूटने, चुनाव लड़ने और जीतने तक सीमित रखना चाहते हैं। लेफ्ट, राइट और सेंटर में ही हम बटे रहेंगे तो देश के असली धरतीपुत्र का हम सम्मान कैसे रख पाएंगे ?चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार का आभार जताते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि एक जमीनी सरकार जो जमीन की आवाज को समझती है और उसे बुलंद करना चाहती है, ऐसी ही सरकार धरतीपुत्र चरण सिंह को भारत रत्न दे सकती है।

