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400+के लक्ष्य के लिए एनडीए का कुनबा बढ़ाने में जुटी बीजेपी,पूर्व सहयोगी दल से भी बातचीत

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संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में संसद में अबकी बार 400 पार का नारा दिया है।उन्होंने दावा किया कि आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को अकेले 370 से अधिक सीटें आएगी और एनडीए के घटक दलों को मिलाकर यह आंकड़ा 400 प्लस हो जाएगा। पीएम मोदी के इस नारे को हकीकत को तब्दील करने में बीजेपी पूरी तरह से जुट गई है। क्षेत्रीय दलों से बात की जा रही है और उन्हें एनडीए में शामिल करने की पहल की जा रही है। जेडीयू के साथ गठबंधन होने के बाद बीजेपी ने एकतरफ जहां अपने पुराने सहयोगी राजनीतिक दल तेलगु देसम और अकाली दल के साथ भी बातचीत शुरू कर दी है,तो वहीं दूसरी तरफ यह राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी के साथ भी बातचीत में लगी हुई है।

2019 में टीडीपी ने छोड़ा था एनडीए

वर्ष 2019 ईस्वी में चंद्र बाबू नायडू के नेतृत्ववाली तेलुगु देशम लोकसभा चुनाव से पूर्व एनडीए गठबंधन को छोड़कर इससे अलग हो गई थी।दरअसल तब चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और आंध्र प्रदेश की बेहतरी के लिए यह आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे।केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने से नाराज होकर चंद्रबाबू नायडू ने तब एनडीए को अलविदा कह दिया था।

बीजेपी और टीडीपी को अब महसूस हुआ एक दूसरे की जरूरत

हालांकि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश के 25 में से 22 सीट जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस को मिल गई और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलुगू देशम को लोकसभा चुनाव में मात्र तीन सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।लोक सभा चुनाव के बाद विधानसभा के चुनाव परिणाम में भी में यही नजारा देखने को मिला।जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस ने विधान सभा के चुनाव में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्ववाली तेलुगु देशम को करारी हार देते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी तक हथिया ली।

5 वर्षों तक सत्ता से दूर रहने के बाद अब एनडीए छोड़ने वाले चंद्रबाबू नायडू को सत्ता के लिए एक बार फिर से बीजेपी के साथ की जरूरत महसूस होने लगी है,तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी को भी अपने दक्षिण विजय अभियान के लिए एक भरोसेमंद साथी की जरूरत है। चंद्रबाबू नायडू पूर्व में एनडीए के संयोजक तक रह चुके हैं,ऐसे में नरेंद्र मोदी की फेज 2 वाली सरकार को कई मुद्दों पर राज्यसभा में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी से मिले लगातार समर्थन के बावजूद बीजेपी तेलुगु देशम पार्टी को अपने साथ लेने में ज्यादा उद्दत दिख रही है।इस क्रम में तेलुगु देशम पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को दिल्ली पहुंचकर सबसे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मुलाकात की और इसके बाद आधी रात के करीब वे गृह मंत्री अमित शाह के घर पहुंचे। यहां दोनों नेताओं के बीच आगामी राजनीति को लेकर लंबी चर्चा हुई।

अकाली दल और बीजेपी में दुबारा साथ होने की कवायद शुरू

1998 ई से एनडीए गठबंधन के साथ रह रहा अकाली दल ने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए तीन कृषि बिलों के विरोध में 2020 ईस्वी में एनडीए छोड़ दिया था। इसके बाद पंजाब में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल की राजनीतिक स्थिति ऐसी बनी की न सिर्फ इस गठबंधन को पंजाब की सत्ता गवानी पड़ी, बल्कि चुनाव में इनके जीते सीटों की संख्या भी काफी कम हो गई।

फिलहाल पंजाब में बीजेपी और अकाली दल ,दोनो ही राजनीतिक दल संघर्ष करते दिख रहे हैं।सत्ता की छटपटाहट अब इन दोनों राजनीतिक दलों को एक साथ दोबारा आने पर विचार करने के लिए मजबूर कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि अकाली दल प्रमुख सुखबीर बादल ने पंजाब में गठबंधन के लिए बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के साथ प्रारंभिक बातचीत की है। बीजेपी और अकाली दल दोनों ही राजनीतिक दल इस समय पंजाब मे विपक्षी गठबंधन इंडिया के घटक दल आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान की स्थिति का लाभ उठाकर सत्ता पर काबिज होने के लिए दोनो राजनीतिक दलों के साथ होने को अनिवार्य मान रहे हैं।

सबसे ज्यादा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में विशेष कवायद

भले ही उत्तर प्रदेश में जहां लोकसभा के सबसे ज्यादा 80 सीटें हैं, वहां बीजेपी की स्थिति अच्छी है, लेकिन इसके बावजूद बीजेपी वहां चुनाव पूर्व ही विपक्षी गठबंधन को नेस्तनाबूद कर अपनी स्थिति को और भी मजबूत करने में जुट गई है।इस क्रम में भारतीय जनता पार्टी की बातचीत आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी के साथ आगे बढ़ रही है।माना जा रहा है कि वहां आरएलडी और बीजेपी के बीच सीटों की संख्या पर भी सहमति बन चुकी है, सिर्फ कुछ विशिष्ट सीटों पर मामला फंसा हुआ है।

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