न्यूज़ डेस्क
नीतीश कुमार ने जो किया है उससे विपक्ष के नेताओं से ज्यादा सत्ता पक्ष बीजेपी भी हतप्रभ है। बीजेपी को भी लग रहा है कि अगर इसी तरह से कोई राजनीति चलती रही और ऐसी राजनीति की पनाह बीजेपी के साथ होती रही तो एक दिन बीजेपी ही सबसे बड़ी कदाचारी पार्टी कहलाने लगेगी। बीजेपी के भी कई नेता कह रहे हैं कि अगर राजनीति इसी ढर्रे पर चलती है और इसे राजनीति कहते हैं तो इस तरह की राजनीति नहीं की जानी चाहिए। जिस राजनीति में आदर्श नहीं उस राजनीति से कभी देश और समाज का कल्याण नहीं हो सकता।
बीजेपी के एक सांसद तो यहाँ तक कहते हैं कि नीतीश के खेल से अभी बीजेपी को लाभ ही हुआ है। चेहरा तो नीतीश का ख़राब हुआ लेकिन बीजेपी की एक और राज्य में सरकार बन गई। लेकिन आगे क्या होगा यह कौन जानता है ?और ऐसी राजनीति नहीं की जानी चाहिए। फिर तो कोई किसी पर यकीन ही नहीं करेगा।
उधर ,नीतीश कुमार के पाला बदलने और एनडीए में शामिल होने पर विपक्षी गठबंधन की पार्टियां खासी नाराज हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवेसना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के एक लेख में नीतीश कुमार की तीखी आलोचना की है। सामना के लेख में लिखा गया है कि नीतीश कुमार ने ही भाजपा विरोधी ताकतों को इकट्ठा किया था और उन्होंने ही विपक्षी गठबंधन की पटना में पहली बैठक बुलाई थी।
सामना के लेख के अनुसार, इंडिया ब्लॉक के गठन के बाद, ऐसा लगता था कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय नेतृत्व को लीड करेंगे। विपक्षी पार्टियों को भाजपा की तानाशाही के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहिए। इसके लिए नीतीश कुमार ने बीड़ा उठाया और सभी को साथ लेकर आए। पटना में भाजपा विरोधी ताकतों की पहली बैठक करायी। उस बैठक में नीतीश ने भाषण देते हुए कहा था कि देश खतरे में है, संविधान खतरे में है। केंद्रीय जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल हो रहा है और देशहित में हमें अपने मतभेदों को भुलाकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए।
नीतीश ने पटना में बड़ी-बड़ी बातें कही थी। बाद में वे बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली की बैठकों में भी शामिल हुए। वह भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए आखिरी वक्त तक समर्पित थे, लेकिन अब उनका समर्पण सबके सामने आ गया है। नीतीश कुमार ने पाला बदल लिया।’
नीतीश कुमार ने रविवार को बिहार सीएम पद से इस्तीफा देकर भाजपा के साथ गठबंधन कर फिर से सरकार बना ली। नीतीश के नेतृत्व में रविवार शाम पांच बजे ही नई सरकार ने शपथ भी ले ली। नई सरकार की कमान भी नीतीश कुमार संभालेंगे। वहीं भाजपा के खेमे से प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष रहे विजय सिन्हा को डिप्टी सीएम बनाया गया है। नई सरकार में तीन कैबिनेट मंत्री जदयू खेमे से और तीन मंत्री भाजपा खेमे से बने हैं। हम पार्टी से एक और एक निर्दलीय विधायक ने भी मंत्री पद की शपथ ली है।
उधर ,इंडिया गठबंधन की सहयोगी पार्टी डीएमके के नेता आरएस भारती से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ‘इस बात की क्या गारंटी है कि नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव तक एनडीए गठबंधन का हिस्सा बने ही रहेंगे? अभी इंतजार करिए।’ डीएमके सांसद टीआर बालू ने भी नीतीश कुमार की आलोचना की है।
नीतीश का एनडीए खेमे में जाना विपक्षी गठबंधन के लिए बड़ा झटका है, लेकिन विपक्षी गठबंधन के नेता इस बात से इनकार कर रहे हैं। डीएमके सांसद टीआर बालू ने कहा कि ‘नीतीश कुमार का जाना विपक्षी गठबंधन के लिए कोई झटका नहीं है। नीतीश कुमार ने कहा कि विपक्षी गठबंधन में कोई काम नहीं हुआ तो उन्होंने कौन सा प्लान दिया था? उन्होंने खुद कोई योजना नहीं दी। वह बस कहते थे कि हम सभी को हिंदी में बात करनी चाहिए, लेकिन हमने इसे बर्दाश्त किया।
सभी पार्टियां ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती हैं, लेकिन यह गठबंधन है और हमें सीटों का बंटवारा करना पड़ता है। मेरी इच्छा है कि डीएमके तमिलनाडु में 20 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े।’ कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे पर टीआर बालू ने कहा ‘दोनों पार्टियों के बीच पहले चरण की बातचीत हो चुकी है और दूसरे चरण की बात 9 फरवरी के बाद होगी।’
कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने नीतीश कुमार के एनडीए के साथ जाने पर निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि ‘नीतीश कुमार का इंडिया गठबंधन छोड़ना हम सभी के लिए निराशाजनक है। वह इस गठबंधन के कप्तान थे। हमें इस पर सोचने की जरूरत है कि ऐसे हालात क्यों बने। जो नेता गठबंधन को लेकर समन्वय कर रहे थे, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वह राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को स्थिति से अवगत कराने में नाकाम रहे।’

