झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को आईना दिखाने में जुटी जनता

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रांची (बीरेंद्र कुमार): आम तौर पर जनता सत्ताधारी दल को चुनाव के वक्त ही आइना दिखा सकती है। लेकिन झारखंड में जनता सत्ताधारी दल को सत्ता में रहते हुए ही आईना दिखा रही है। झारखंड की हेमंत सोरेन की सरकार पिछले 2 सालों से झारखंड की स्थापना दिवस, 15 नवंबर के अवसर पर ‘ आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार’ कार्यक्रम चलाती आ रही है। इस कार्यक्रम के भव्य आयोजन पर सरकार जनता की गाढ़ी कमाई से अदा किए गए टैक्स के लाखों लाख रुपये खर्च कर देती है। इसके पीछे हेमंत सोरेन के नेतृत्ववाली सरकार यह दावा करती है कि उनके द्वारा चलाए जा रहे ‘ सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम में सरकार खुद जनता के द्वार जाकर जनता के सारे कामों का निपटारा कर दे रही है। लेकिन कई बार हकीकत इसके विपरीत पाया जाता है। सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में आवेदन देने के बावजूद कई लोगों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का हक उन्हें नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अब ऐसे कई लोग मजबूरी में सरकार को आईना दिखाने में जुट गई है।

जनता और समाजसेवी चला रही जनता सरकार के द्वार

झारखंड सरकार द्वारा कल्याणकारी सरकार होने का दावा करने की वजह से लोगों की ‘ सरकार आपके द्वार ‘ कार्यक्रम से अपेक्षा काफी बढ़ी है। सरकार कागजों में इसे अपनी एक बड़ी उपलब्धि भी दिखती है,जबकि हकीकत में सरकार उनके भरोसे पर खड़े नहीं उतर पा रही है। सरकारी राजस्व की भारी राशि खर्च करने भी जनता की एक बड़ी जमात को उसका लाभ नहीं मिल पाता है।

ऐसे में अब ये हाथों में’सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम में मिले आवेदन पत्र की प्राप्ति रसीद लेकर सरकार के अंग यानी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे है। पीड़ित रेखा देवी ने बताया की उन्होंने 2021और 2022 में सरकार द्वारा झारखंड स्थापना दिवस पर’सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम के दौरान अपने क्षेत्र में लगाए गए कैंप में प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन दिया था। लेकिन अबतक इन्हें न तो आवास के लिए राशि मिली और न ही इन के आवेदन को रद्द करने से संबंधित कोई सूचना दी गई। ऐसे में अब ये और इनकी जैसी महिलाएं हाथों में कैंप में दिए आवेदन की प्राप्ति रशीद लेकर सरकार को आईना दिखाने के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर जनता सरकार के द्वार कार्यक्रम चला रहे हैं।

सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के नाम पर पैसे और समय दोनों की होती है बर्बादी

‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम में आवेदन करने के बावजूद अब तक परेशान चल रहे लोगों की संख्या झारखंड में कम नहीं है। ऐसे में अब ये सरकारी दफ्तरों के पास ही बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर सरकार के विरुद्ध ‘ जनता सरकार के द्वार’कार्यक्रम चलाने के लिए मजबूर हो गए है। इनका मानना है कि जो काम सरकार को स्वत: अपने अधिकारियों के मार्फत करवा लिया जाना चाहिए, उसके लिए सरकार को कार्यक्रम चलाना पड़ता है। मुख्यमंत्री तक ऐसे कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता एहतेशाम अहमद सरकार पर तंज कसते हुए कहते है कि सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसे बर्बाद होते हैं, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में लोग सरकार द्वारा दिए जाने वाले कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित ही रह जाते हैं तो फिर ऐसे कार्यक्रमों की उपयोगिता क्या है? ऐसे में अब सरकार को उनकी करतूत का पर्दाफाश करने के लिए जनता सरकार का द्वार कार्यक्रम चलाना पड़ रहा है। वस्तुतः इस कार्यक्रम को आयोजित करने के नाम पर महीनों पहले से ही जानता को जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जाता है क्योंकि मंत्री और मुख्यमंत्री के’सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम में शिरकत करने पर लाभुकों की संख्या बढ़ा कर दिखाया जा सके। इसके अलावा महीने भर चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों के अपने दफ्तरों से बाहर इस कार्यक्रम में व्यस्त रहने की वजह से नए लोग जनकल्याणकारी योजना के लिए आवेदन भी नहीं कर पाते हैं।और कैंपों में आवेदन लेकर भी दिखावे से ज्यादा कोई काम नहीं होता है।

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