ममता बनर्जी के तेवर से इंडिया गठबंधन के छोटे दलों को मिलेगी ताकत, कांग्रेस पर बढ़ेगा दबाव

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव एलियांज (इंडिया)को बड़ा झटका दिया है।सीट बंटवारे से नाराज तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदेश में सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। ममता बनर्जी ने एकला चलो की अपनी घोषणा तब की है,जिस समय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई वाली भारत जोड़ो न्याय यात्रा गुरुवार को पश्चिम बंगाल के कुच बिहार पहुंच रही है।

डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने जिस प्रकार से सीटों के बंटवारे को लेकर अपने तेवर तल्ख किए हैं और अकेले ही पश्चिम बंगाल के सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, उससे कांग्रेस के ऊपर दबाव काफी बढ़ गया है। कांग्रेस हालांकि डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटी हुई है ,लेकिन अब यह आ रहा उतना आसान भी नहीं रहा। ममता बनर्जी को मनाने के लिए कांग्रेस को अब उनकी सभी शर्तों को स्वीकार करना होगा।गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस लगातार कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में दो सीट देने की पेशकश कर रही है , जबकि कांग्रेस पार्टी वहां कम से कम पांच सीट चाहती है।इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी को अपने प्राचीन बंगाल प्रदेश अध्यक्ष अधीररंजन चौधरी को भी चुप कराना होगा, जो अक्सर तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर तीखे बयान देते रहते हैं।

ममता बनर्जी के इस तेवर से क्षेत्रीय दलों को मिलेगी ताकत

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एकला चलो के ऐलान से इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के साथ अपने शर्तों पर तोलमोल की उनकी ताकत तो बढ़ेगी ही साथ ही इससे दूसरे क्षेत्रीय घटक दलों के भी कांग्रेस के साथ तोलमोल करने की ताकत बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तीन दौर की बातचीत के बावजूद अभी तक सीट शेयरिंग पर कोई सहमति नहीं बन पाई है। वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली थी। पर गठबंधन में कांग्रेस पार्टी 15 सीट मांग रही है ।ममता बनर्जी के तल्ख लहजे से अब समाजवादी पार्टी को भी कांग्रेस के साथ तोलमोल करने की बड़ी ताकत मिलेगी।

समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस को जमीनी हकीकत समझना होगा।वर्ष 2017 में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी गठबंधन में 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह सिर्फ 7 सीट ही जीत पाई थी।इसी तरह 2014 लोकसभा चुनाव दो और 2019 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट ही कांग्रेस को मिली थी, ऐसे में कांग्रेस को अपने जमीनी स्थिति को समझते हुए सीटों पर दावेदारी करनी चाहिए।समाजवादी पार्टी, आरएलडी के साथ सीट बंटवारा कर चुकी है और दूसरी अन्य छोटी पार्टियों के साथ भी इसकी चर्चा जारी है ।

बिहार, झारखंड और तमिलनाडु में भी कांग्रेस को पड़ सकता है झुकना

आगामी लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी के बंगाल में एकला चलो की नीति अपनाने के बाद अब बिहार, झारखंड तथा तमिलनाडु में भी क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़ गई है। बिहार में आरजेडी और जेडीयू कांग्रेस पार्टी को 4 से 5 सीट में देना चाह रही है, जबकि कांग्रेस 9 से 10 सीटों की मांग पर अड़ी हुई थी।लेकिन अब पश्चिम बंगाल की इस घटना के बाद आरजेडी और जेडीयू का मनोबल बढ़ेगा और कांग्रेस को इनके शर्तों पर समझौता करना होगा। इसी तरह झारखंड में जेएमएम इस बार कांग्रेस को 2019 की तर्ज पर सेट देने के लिए तैयार नहीं है ।वहीं तमिलनाडु में भी कांग्रेस का डीएमके के साथ सीट बंटवारे को लेकर लगातार बयान बाजी चल रही है। ऐसे में कांग्रेस पर अब दबाव काफी बढ़ गया है। पार्टी के एक नेता ने कहा कि कब कांग्रेस को गठबंधन बरकरार रखने के लिए क्षेत्रीय दलों की बात माननीय होगी, नहीं तो इंडिया गठबंधन टूटने के लिए इसे ही जिम्मेदार माना जाएगा।

कांग्रेस को अपनी जिम्मेदारी का है अहसास

कांग्रेस की एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को अपनी जिम्मेदारियां का एहसास है। हम सभी को साथ लेकर चलने की पूरी कोशिश करेंगे ।उन्होंने स्वीकार किया कि ममता बनर्जी के इस तल्ख रुख से सीट बंटवारे पर पार्टी की क्षेत्रीय दलों के साथ सौदेबाजी की ताकत कम हुई है। पार्टी को अब और सावधानी के साथ घटक दलों के साथ चर्चा करनी होगी, ताकि उन्हें नाराज होने का कोई मौका ना मिले। मौजूदा राजनीतिक पतिस्थिति में पार्टी इसे अपनी जिम्मेदारी भी मानती है।

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