बीरेंद्र कुमार झा
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान बिलकिस बानो से सामूहिक दुष्कर्म और उनके परिवार के साथ सदस्यों की हत्या के मामले में 11 दोषियों को सजा से छूट देने की राज्य सरकार के फैसले को सोमवार को रद्द कर दिया है। इसके बाद से राजनीतिक प्रतिक्रिया आनी प्रारंभ हो गई है। इस मामले पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अंततः न्याय की जीत हुई। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के दौरान गैंगरेप की शिकार बिलकिस बानो के आरोपियों की रिहाई रद्द करने का काम किया है। इस आदेश के बाद बीजेपी की महिला विरोधी नीतियों पर पड़ा हुआ पर्दा हट गया है। इस आदेश के बाद जनता का न्याय के प्रति विश्वास और मजबूत होगा। बहादुरी के साथ अपनी लड़ाई को जारी रखने के लिए बिलकिस बानो को बधाई।
सुनवाई के दौरान क्या कहा शीर्ष कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति बीवी नगरत्न और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ ने सजा में छूट को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं को सुनवाई योग्य करार दिया और कहा कि गुजरात सरकार सजा में छूट का आदेश देने के लिए उचित सरकार नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से दोषियों की सजा माफी की याचिका पर विचार करने संबंधी एक अन्य पीठ के 13 मई 2022 के आदेश को अमान्य माना है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को कई मामले को छुपाने के आरोप में भी फटकार लगाया।गौरतलब है कि घटना के वक्त बिलकिस बानो 21 साल की थी, साथ ही वह उस वक्त 5 माह की गर्भवती भी थी।बिल्किस बानो से गोधरा ट्रेन में आग लगाए जाने की घटना के बाद भड़के दंगों के दौरान दुष्कर्म किया गया था, जिस पर पूरे देश में चर्चा हुई थी। दंगों में मारे गए उनके परिवार के 7 सदस्यों में उनकी 3 साल की बेटी भी शामिल थी।
सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार के फैसले के विरुद्ध डाली गई थी याचिका
दरअसल गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो मामले में सभी 11 दोषियों को 15 अगस्त 2022 को सजा में छूट दे दी थी, और उन्हें रिहा कर दिया था ।आम तौर पर राज्य सरकारें अपराधियों की सजावधी के दौरान जेल में रहते हुए उनके अचार विचार और अन्य चीजों को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस पर कुछ कैदियों को हर वर्ष रिहा करती है।गुजरात सरकार ने इसी के तहत बिल्किस बानो मामले में सभी 11 दोषियों को जेल से रिहा किया था।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार के फैसले की विरुद्ध याचिका दायर की गई थी।

