बीरेंद्र कुमार झा
जब – जब विपक्ष की चुनाव में पराजय होती है,तब – तब यह ईभीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल जरूर उठता है। वर्ष 2023 के दिसंबर महीने में पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने पर जब कांग्रेस को सिर्फ एक ही राज्य में सफलता मिली और बाकी राज्यों में पराजय का सामना करना पड़ा, खासकर राजस्थान और छत्तीसगढ़ इसके हाथ से छीने जाने और मध्य प्रदेश में बीजेपी की सत्ता बरकरार रहने से ईभीएम की विश्वसनीयता पर कांग्रेस एकबार फिर से सवाल उठने लगी है। इंडिया गठबंधन के दलों ने कई बार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ईभीएम को लेकर चिंता जताई है।इस बार विपक्ष का कहना है कि वोट डालने के बाद हर वोटर को उसके भीभीपैट (वोटर वेरीफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल)
स्लिप दिया जाना चाहिए। अब इस पर चुनाव आयोग की तरफ से भी पत्र जारी करके जवाब दिया गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश को जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा है कि ईभीएम का प्रयोग न्यायशास्त्र के अनुकूल, लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए शुरू किया गया था।यह हर तरह से कानून के दायरे के अंदर है और इससे निष्पक्ष चुनाव करना आसान हो जाता है।
चुनाव आयोग ने पत्र लिखकर दिया जबाव
विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा सभी मतदाताओं को भीभीपैट की पर्ची दिए जाने को लेकर प्रधान सचिव प्रमोद कुमार शर्मा की तरफ से भी एक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में बताया गया है कि भारत के चुनाव में इस्तेमाल होने वाले ईभीएम को भारत सरकार ने न्यायशास्त्र और 40 साल के न्यायिक आदेशों को ध्यान में रखते हुए शुरू किया था।पत्र में यह भी कहा गया है कि कई बार ईभीएम और भीभीपैट के खिलाफ कोर्ट में भी याचिका फाइल की गई थी। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने ही याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना लगाने के साथ ही याचिका को भी खारिज कर दी थी।
क्या लिखा था विपक्ष ने चुनाव आयोग को भेजे अपने पत्र में
19 दिसंबर को विपक्षी दलों ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें ईभीएम पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को एक मेमोरेंडम दिया गया था। इसमें कहा गया था की भीभीपैट मशीन में दिखाई देने वाली स्लिप वोटर को दे देनी चाहिए और उसे दूसरे बॉक्स में डलवा देना चाहिए।इसके बाद सभी भीभीपैट की भी गिनती होनी चाहिए और उसे ईभीएम के साथ मैच करना चाहिए। इसके बाद 30 दिसंबर को जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को इस संबंध में एक पत्र भेजा था।
क्या है भीभीपैट की वर्तमान व्यवस्था
वर्तमान समय में भीभीपैट की पांच रसीदों को चुना जाता है और उसे ईभीएम के साथ मैच कराया जाता है। विपक्ष के सवाल का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि सैंपल में अगर कोई मिसमैच नहीं पाया जाता है तो यह समझा जाता है कि ईभीएम बिल्कुल सही काम कर रही है। इसके अलावा ईभीएम के प्रयोग से चुनाव की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ता है। चुनाव आयोग ने कहा कि अब तक कुल 38,156 भीभीपैट को मैच किया जा चुका है, लेकिन कोई भी मिसमैच नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लागू हुआ था भीभीपैट
चुनाव आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 2013 के फैसले के बाद ही भीभीपैट को लागू किया गया था। उस समय के सीजेआई पी सदाशिवम और जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि पेपर ट्रेल इस बात को प्रमाणित करता है कि चुनाव निस्पक्ष हो रहे हैं। ईभीएम एवं और भीभीपैट सिस्टम चुनावी प्रक्रिया में सटीकता को दिखाता है।
भीभीपैट की क्वालिटी होती है विषेश
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि भीभीपैट एक थर्मल पेपर होता है ,जो 5 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।भीभीपैट स्लिप पर कैंडिडेट का सीरियल नंबर ,उसका नाम ,पार्टी और चुनाव निशान होता है। इसके अलावा इस पर एक भीभीपैट आईडी भी होती है।

