नए हिट एंड रन कानून के विरोध में सड़कों पर उतरे ड्राइवर ,लोगों की बढ़ी परेशानी

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बीरेंद्र कुमार झा

हिट एंड रन केस को लेकर सरकार ने अंग्रेजों के जमाने के पुराने कानून की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू की है ।इसमें सजा के प्रावधान से कमर्शियल और प्राइवेट बहनों की ड्राइवर परेशान है। सजा में 5 से ₹7 लाख रुपए के जुर्माने और 10 साल के कैद की बात कही गई है। कमर्शियल ट्रक और बस ड्राइवर इसका विरोध कर रहे हैं।इन्होंने 1 से 3 जनवरी तक देश व्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।इसके तहत आज हड़ताल के दूसरे दिन इसका असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है। इससे पूरे देश में तेल, सब्जी, गैस, दूध,फल जैसी जरूरी चीजों की किल्लत समेत दैनंदिनी के अन्य जरूरी चीजों की कमी होनी शुरू हो गई है और या तो ये अनुपलब्ध हो गए है या फिर इसके लिए लोगों को सामान्य से कई गुना ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।

नए कानून में क्या है प्रावधान

नए भारतीय दंड संहिता के मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अब हिट एंड रन केस में चालक को 10 साल की जेल और साथ में 7 लाख का जुर्माना लगेगा।अब अगर कोई ड्राइवर किसी को धक्का मार कर भाग जाता है तो उसे कानून के तहत कड़ी कार्यवाही झेलनी पड़ेगी। हालांकि एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने की स्थिति में उसके साथ कुछ रियायत की जा सकती है। वही पुराने हिट एंड रन केस के मामले आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) 304 ए (लापरवाही के कारण मौत) और 338 (जान जोखिम में डालना) तथा कुछ मामलों में धारा 302 भी जोड़ी जाती थी। इसमें सामान्य तौर पर 2 वर्ष की कैद की सजा थी ।

क्या है ड्राइवर की चिंता

इस मामले में ड्राइवरों की चिंता यह है कि अगर उनसे एक्सीडेंट होता है तो घटनास्थल में रुकने से उन्हें भीड़ से कौन बचाएगा? आमतौर पर ऐसी घटनाओं में भीड़ का सारा गुस्सा ड्राइवर पर निकलता है। भीड़ चालक को जान से मारने पर उतारू हो जाती है।ड्राइवरों की यह भी चिंता है कि अगर उनकी गलती नहीं भी है और गलती एक्सीडेंट होने वाले की है, तो भी उन्हें इस कानून का सामना करना पड़ेगा।इसके अलावा ड्राइवर संघ का यह भी कहना है की कई बार मानवीय भूल या यांत्रिकी त्रुटि की वजह से भी दुर्घटनाएं हो जाया करती हैं। साथ ही ड्राइवर के संगठन ने इस बात की लेकर की चिंता जाता है कि एक तो सरकार ने ऐसे कठोर कदम वाले कानून बनाते समय उनसे कोई बात नहीं की,दूसरे उसमें सजा का प्रावधान काफी कड़ा है।सवालिया लहजे में ड्राइवरों के संगठन ने सरकार से पूछा कि ड्राइवर के पास अगर ₹7 लाख रुपए होते तो क्या वह कोई धंधा नहीं कर किसी की ड्राइवरी क्यों करता?

आम जीवन पर पड़ रहा असर

* स्कूल वैन के ड्राइवर के बीच में शामिल होने के कारण स्कूल खुलने के बावजूद बच्चे स्कूल और कॉलेज क्लास करने नहीं जा पा रहे हैं।

* नए साल में सैलानियों के घूमने फिरने में परेशानी उठानी पड़ रही है। बड़ी संख्या में सैलानी कुल्लू ,मनाली , गोवा जैसे पिकनिक स्पॉट में जाकर फंसे हुए हैं ।

* लोगों को पेट्रोल और डीजल की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।पेट्रोल पंपों पर दो पहिया और चार पहिया वाहनो की भारी भीड़ लगी हुई है।

* गैस के टैंकर ना चलने के कारण सीएनजी, पीएनजी,प्राकृतिक गैस और एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई नहीं हो पा रही है, जिससे लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

* गाड़ियों के नहीं चलने से रोजाना इस्तेमाल में आने वाले वस्तुओं जैसे दूध, फल,सब्जी, दवाई पानी पर भी इसका असर पड़ रहा है। या तो इन चीजों का मिल पाना कठिन हो रहा है या नहीं तो फिर इसके लिए लोगों को बहुत ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं।

* यात्री बसों का परिचालन नहीं होने से यात्रियों को एक जगह से दूसरे जगह जाने- आने में भी कई गुना ज्यादा पैसा देना पड़ता है। छोटे वाहन जैसे टेंपो, रिक्शा टोटो और प्राइवेट गाड़ियां यात्रियों से तायसुदा भाड़ा की जगह चार गुना- 5 गुना ज्यादा भाड़ा वसूल रहे हैं।

 

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