959 आपराधिक चरित्र वाले नेता यह चुनाव जीत गए तब इस लोकतंत्र का क्या होगा ?

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अखिलेश अखिल 
क्या कभी आपने यह सोंचा है कि इस देश की राजनीति इतनी बदनाम क्यों है?राजनीति करने वाले लोग अपराधी कैसे हैं ? या फिर अपराध करने वाले लोग राजनीति क्यों कर रहे हैं ? सवाल तो यह भी है कि राजनीति तो देश और समाज को सुधार करने के लिए की जाती है। समाज का विकास हो ,समाज से अपराध कम हो ,समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा बेहतर हो ,सबका कल्याण हो और सब का सामान विकास हो। राजनीति का अंतिम लक्ष्य तो यही है।

लेकिन राजनीति में जब अपराधी पनाह लेने लगे या अपराधी को राजनीति पनाह दबने लगे तो आप क्या करेंगे ? आप किससे शिकायत करेंगे ? आपकी फ़रियाद कौन करेगा ? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। उस प्रधानमंत्री के पास भी नहीं जो देश को आगे बढ़ाने का दम्भ बढ़ता है और उस गृह मंत्री को भी नहीं जो देश को सुरक्षित रखने क ऐलान करता फिरता है।  
     सच तो यही है कि  देश के भीतर सब कुछ गड़बड़ है। सच यह भी है कि अपराध राजनीति पर भारी है। अपराध है तो राजनीति है और राजनीति है तो अपराध चलता ही रहेगा। यह गजब का समन्वय है। इसे आप समझाइये या नहीं। लेकिन सच यही है।  
 हालिया एडीआर की रिपोर्ट जो बता रही है वह आँख खोलने वाली है। पांच राज्यों के चुनाव में जितने अपराधी किस्म ने नेताओं ने चुनाव में शिरकत की है अगर वे सभी जीत जाए तो इस देश का क्या  होगा ,कहा नहीं जा सकता। देश की राजनीति में अपराध का गठजोड़ किस कदर बढ़ गया है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव लडऩे वाले 18 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है। इनमें से 12 प्रतिशत मामले गंभीर अपराध से जुड़े हैं। इसके साथ ही हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मामलों में आरोपी लोग भी पार्टियों ने प्रत्याशी बनाए हैं।       
            राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव लडऩे वाले 8054 प्रत्याशियों में से 8051 प्रत्याशियों के शपथ-पत्रों के विश्लेषण के बाद चुनाव अधिकार निकाय एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। खास बात यह है राष्ट्रीय पार्टियों के उम्मीदवारों पर सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज है।           
   चुनाव मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों के पास धन की भी कोई कमी नहीं है। चुनाव लडऩे वाले 29 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति है। इस मामले में मिजोरम में चुनाव लडऩे वाले 66 फीसदी उम्मीदवारों की संपत्ति एक करोड़ से अधिक है। अगर चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों की औसत संपत्ति की बात की जाए तो करीब 3.36 करोड़ रुपए है।    अब आप ही बताये इन नेताओं के पास पैसे कहाँ से आते हैं। इन नेताओं को पनाह कौन देता है ? इन नेताओं को दंड क्यों नहीं मिलता > इन नेताओं के लिए क्या कोई कोर्ट और थाना नहीं है ? जिसकी सरकार होती है वहां सबसे ज्यादा अपराधी पनपते हैं। सरकार बदलती है तो अपराधी भी पाला बदल लेते हैं। 

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