कोलकाता (बीरेंद्र कुमार): ‘दुआरे राशन योजना’ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। पूर्व में कोलकाता हाईकोर्ट ने’दुआरे राशन योजना’ को अवैध करार दिया था,लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाकर ममता बनर्जी की सरकार को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार को इस योजना को आगे चलाने से रोकने वाला कोई कानूनी बाधा नहीं है।
कोलकाता हाई कोर्ट ने योजना पर रोक लगाने का दिया था आदेश
ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान’ दुआरे राशन योजना’ शुरू करने की घोषणा की थी। सत्ता में आने के बाद नवंबर 2021 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस योजना की शुरुआत भी कर दी थी,इस योजना के अंतर्गत घर-घर राशन पहुंचाने का काम भी शुरू हो गया था, लेकिन राशन डीलरों ने कमीशन के मुद्दे को लेकर इसका विरोध शुरू कर दिया। राशन डीलरों के एक समूह ने इस’दुआरे राशन योजना’ की वैधता को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में मामला दायर कर दिया। इस मामले में कोलकाता उच्च न्यायालय ने कहा कि इस योजना की कोई कानूनी वैधता नहीं है।’दुआरे राशन योजना’ खाद्य अधिकार अधिनियम के खिलाफ है, इसलिए इसका क्रियान्वयन नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था,जहां अंततः इस मामले में उसे राहत मिल गई। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अभी इस मामले की सुनवाई आगे भी चलती रहेगी।
ममता बनर्जी ने हर हाल में’ दुआरे राशन योजना’ को लागू करने का किया था ऐलान
भले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट ‘दुआरे राशन योजना’ का मामला न्यायालय में है, लेकिन ममता बनर्जी इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। हाल ही में विधानसभा सत्र में उन्होंने यह टिप्पणी की थी कि वह राज्य में इस योजना को जारी रखने के लिए किसी भी ताकत के सामने नहीं झुकेगी। उन्होंने इस योजना के लागू होने को लेकर उम्मीद जताई थी। ऐसे में पंचायत चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ी राहत मिली है। अब वे अपने कहे अनुसार दुआरे राशन योजना’ को जारी रखकर लोगों को उनके घर तक राशन पहुंचा सकती हैं।

