राचीं (बीरेंद्र कुमार): झारखंड के कांके थाना क्षेत्र स्थित मिल्लत कॉलोनी के निवासी गुलाम अशरफ उर्फ रौनक, पिता अब्दुल कलाम को गिरफ्तार करने जब बिहार के सिवान से पुलिस के 2 जवान मिल्लत कॉलोनी आए तो, स्थानीय लोगों ने अपहरणकर्ता समझकर उनकी जमकर पिटाई कर दी। दरअसल यह दोनों जवान सादे वर्दी में थे और इनके पास उस समय गिरफ्तारी के लिए जरूरी वारंट पेपर ही नहीं था। बाद में पहचान पत्र दिखाने पर स्थानीय लोगों ने उन्हें छोड़ा।
कैसे घटी यह घटना?
मिल्लत कॉलोनी निवासी गुलाम अशरफ उर्फ रौनक की पत्नी ने सिवान थाने में अपने पति के विरुद्ध दहेज प्रताड़ना को लेकर एक मामला दर्ज करवाया था। इसी मामले में जारी वारंट के तहत सिवान की पुलिस गुलाम अशरफ उर्फ रौनक को गिरफ्तार करने मिल्लत कॉलोनी पहुंची थी। सादी वर्दी में जब पुलिस के दोनों जवान अपने वाहन से मिल्लत कॉलोनी पहुंचे तो उस समय गुलाम अशरफ उर्फ रौनक दाढ़ी बनाने जा रहा था।
सिवान से आए पुलिस के जवानों ने उसे रोका और रोककर पूछताछ करने लगे। इस बीच गाड़ी में बैठे गुलाम अशरफ उर्फ रौनक का साला इंतखाब जो सिवान पुलिस के साथ ही पहुंचा था वह गुलाम अशरफ उर्फ रोनक को देखते ही चिल्लाकर पुलिस से कहने लगा की इसे गाड़ी में लादकर ले चलो। इसके बाद गुलाम अशरफ उर्फ रौनक ने शोर मचाना शुरू कर दिया, जिससे आसपास के दुकानदार और ग्रामीण वहां इकट्ठा हो गए। इस बीच गुलाम अशरफ उर्फ रौनक वहां से फरार हो गया और पुलिस ग्रामीणों के हत्थे चढ़ गई। लोगों ने पुलिस की जमकर पिटाई कर दी।
ग्रामीण पुलिस को अपहरणकर्ता समझ बैठी थी क्योंकि एक तो पुलिस सादी वर्दी में थी दूसरे उसके पास गिरफ्तारी का वारंट पेपर भी नहीं था। बाद में जब सिवान महिला थाना प्रभारी आराधना कुमारी पुलिस की वर्दी में वहां पहुंची और घटना की सूचना पाकर कांके की पुलिस भी गांव पहुंची, तब जाकर लोगों को समझा-बुझाकर सिवान की पुलिस को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया जा सक। कांके पुलिस का कहना था कि सीवान की पुलिस ने बगैर कांके थाना को इस बात की सूचना दिए हुए ही यह कार्रवाई की थी।

