बीरेंद्र कुमार झा
भारत की हरित क्रांति के जनक माने जाने वाले एमएस स्वामीनाथन का गुरुवार को निधन हो गया। वह 98 वर्ष के थे। बताया जा रहा है वह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। इस बीच गुरुवार को चेन्नई में उनके आवास पर उनका निधन हो गया।स्वामीनाथन ने धान की अधिक उपज देने वाले किस्मों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी,जिससे यह तय करने में मदद मिली कि भारत के कम कमाई वाले किसान अधिक उपज पैदा करें।
कृषि विज्ञान में गहरी रुचि
7 अगस्त 1925 को स्वामीनाथन का जन्म कुंभकोनाम में हुआ था।कृषि विज्ञान में उनकी गहरी रुचि स्वतंत्रता आंदोलन में उनके पिता की भागीदारी और महात्मा गांधी के प्रभाव की देन है जिसने उन्हें इस विषय में उच्च अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया ।उन्होंने दो स्नातक डिग्रियां प्राप्त की थी।जिसमें से एक कृषि महाविद्यालय कोयंबटूर से थी ।उनकी तीन बेटियां हैं सौम्या स्वामीनाथन,मधुरा स्वामीनाथन और नित्या राव।हालांकि उनकी पत्नी मीना स्वामीनाथन की मृत्यु पहले ही हो गई थी।
डॉक्टर स्वामीनाथन और हरित क्रांति
डॉक्टर स्वामीनाथन ने हरित क्रांति की सफलता के लिए दो केंद्रीय कृषि मंत्रियों सी सुब्रमण्यम और जगजीवन राम के साथ मिलकर काम किया। एक ऐसा कार्यक्रम जिसने रासायनिक- जैविक प्रौद्योगिकी के अनुकूलन के माध्यम से गेहूं और चावल की उत्पादकता और उत्पादन में क्वांटम छलांग का मार्ग प्रशस्त किया। प्रसिद्ध अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक 1970 के नोबेल पुरस्कार विजेता नॉर्मल बोरलाग के गेहूं पर खोज ने इस संबंध में एक बड़ी भूमिका निभाई थी।
एम एस स्वामिनेशन के जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें
*एम एस स्वामीनाथन के पिता एम के शंबशीवन एक सर्जन और महात्मा गांधी के अनुयाई थे। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन और तमिलनाडु में मंदिर प्रवेश आंदोलन में भाग लिया। इससे स्वामीनाथ के मन में छोटी उम्र में ही सेवा का भाव आ गया।
* अपने पैतृक शहर के एक स्थानीय स्कूल से मैट्रिक करने के बाद उन्होंने एक मेडिकल स्कूल में प्रवेश लिया लेकिन 1943 के बंगाल के कल ने उनका मन बदल दिया और वे कृषि अनुसंधान की दिशा में बढ़ गए।
* पीजी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की और आईपीएस के लिए योग्यता प्राप्त की ।हालांकि उन्होंने आलू आनुवंशकी पर अपना शोध जारी रखने के लिए नीदरलैंड के बैंक निगम कृषि विश्वविद्यालय में यूनेस्को फैलोशिप लेने का विकल्प चुना।
* 1972 से 1979 के बीच वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)के महानिदेशक थे।वहां रहते हुए उन्होंने भारत के राष्ट्रीय पादप, पशु और मछली अनुवांशिकी संस्थान ब्यूरो का गठन किया।
* भारत में किसानों की आत्महत्या के गंभीर मुद्दे को संबोधित करने के लिए सरकार ने 2004 में स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया।

