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केसीआर की बीआरएस पार्टी ने नव गठित इंडिया गठबंधन और बीजेपी पर हमला किया किया है। इंडिया गठबंधन को लेकर बीआरएस ने कहा है कि अभी इस गठबंधन के बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं है। अभी देखने की जरूरत है। चुनाव के पहले और चुनाव के बाद क्या कुछ होता है इस पर नजर रखने की जरूरत है। अब इंडिया गठबंधन के सामने काफी चुनौतियां है। सीट बंटवारे पर ही बवाल होगा। कई राज्यों में क्षत्रपों के बीच तालमेल बैठाना कोई आसान काम नहीं है। सभी क्षत्रप मजबूत हैं और उनकी राजनीति भी प्रभावशाली है। ऐसे में चुनाव के पहले सीटों को लेकर घमसान होगा वही चुनाव बाद सरकार बनाने को लेकर भी द्वन्द खड़े होंगे। ऐसे में अभी कुछ भी कहना ठीक नहीं है।
केसीआर की बेटी और बीआरएस नेता के कविता ने कहा है कि “इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आज का इंडिया गठबंधन कल अस्तित्व में रहेगा या नहीं। उससे पहले राज्य चुनाव और संसद चुनाव के लिए सीट-बंटवारे के मुद्दे होंगे। उसके बाद स्थिति अलग होगी।” उन्होंने आगे कहा कि जब संसद चुनाव के नतीजे आएंगे तो उसके बाद भी स्थिति बदल जाएगी।
उन्होंने कहा, “ऐतिहासिक रूप से, इस देश में चुनाव पूर्व गठबंधन बहुत सफल नहीं रहे हैं। इसलिए, हम निश्चित रूप से इंतजार करेंगे। लेकिन बीआरएस एक राष्ट्रीय एजेंडा और सार्वभौमिक एजेंडे वाली एक राष्ट्रीय पार्टी है। यह कर्नाटक में एक एजेंडे और तेलंगाना में दूसरे एजेंडे वाली कांग्रेस पार्टी की तरह नहीं है।”
कविता ने आगे बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी ने पिछले 10 सालों में तेलंगाना के लिए कुछ नहीं किया है, इसलिए उन्हें कर्नाटक की तरह तेलंगाना में भी नकारात्मक परिणाम मिलेंगे।उन्होंने कहा, “दक्षिण में, लोग हमेशा यह देखते हैं कि कौन सी पार्टी उनके क्षेत्र के मुद्दों को सबसे अधिक उठा रही है, इसलिए यहां परिणाम अलग होंगे। भाजपा ने पिछले 10 वर्षों में तेलंगाना के लिए कुछ नहीं किया है, इसलिए उन्हें कर्नाटक की तरह तेलंगाना में भी नकारात्मक परिणाम मिलेंगे।”
इससे पहले, 31 अगस्त-1 सितंबर को इंडिया के बैनर तले एकजुट हुए विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र में अपनी तीसरी बैठक संपन्न की और आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव सामूहिक रूप से लड़ने के प्रस्तावों को अपनाया और घोषणा की कि सीट-बंटवारे की व्यवस्था को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा।विपक्षी इंडिया गठबंधन की दो दिवसीय बैठक के बाद चार मुख्य समितियों का गठन किया गया जिसमें सभी राजनीतिक दलों के सदस्यों को शामिल किया गया।बता दें कि संयुक्त विपक्ष की पहली बैठक 23 जून को पटना में और दूसरी बैठक 17-18 जुलाई को बेंगलुरु में हुई थी।

