36 वर्षों से सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा रूपधर पटेल का परिवार

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बीरेंद्र कुमार झा

किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना न सिर्फ एक सामाजिक कलंक है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है। उड़ीसा के झारसुगुड़ा जिला में जिला कार्यालय से लेकर विभिन्न सरकारी कार्यालय में इस बात का उल्लेख किया गया है, लेकिन इसके बावजूद झारसुगुड़ा जिला के कोलाबिरा ब्लॉक के दंडबुडा गांव के रूपघर पटेल का परिवार विगत 36 वर्षों से सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा है। इस परिवार ने पुलिस और जिला प्रशासन से लेकर मानवाधिकार आयोग तक में शिकायत की थी, लेकिन आज तक इसका कोई परिणाम नहीं निकल पाया है,जिस कारण इस परिवार पर मानसिक दबाव और उत्पीड़न बढ़ता चला जा रहा है।इधर उप जिलाधीश किशोर चंद्र स्वाई ने दोनों पक्षों को बुलाकर चर्चा की और रूपधर के परिवार को जाति समाज में शामिल करने का आदेश दिया।साथ ही किशोर चंद्र स्वाई ने इस मामले को सुलझाने के लिए 7 दिनों का समय दिया है। साथ ही ऐसा नहीं होने पर उपयुक्त कार्रवाई किए जाने की भी बात कही है।

1987 में परिवार की युवती की शादी का समाज के लोगों ने किया था विरोध

इस परिवार के सदस्य डॉक्टर टेकचंद पटेल ने बताया कि वर्ष 1987 में उनके परिवार की एक युक्ति का विवाह एक अन्य वंश के युवक के साथ मानते हुआ था तब समाज के लोगों ने इसका विरोध किया था इसके बाद वह पक्ष और कन्या पक्ष की के बीच समझौता के बाद शांति पूर्ण ढंग से विवाह संपन्न हुआ।लेकिन इसे लेकर समाज ने रूपधर के परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया। इसके बाद करीब 20 वर्ष पहले आपसी समझौते से या तय हुआ कि पूरे समाज को दावत देने के बाद उन्हें पहले की भांति फिर से जाति में शामिल किया जाएगा।

फिर से शुरू हुआ मानसिक प्रताड़ना देने का दौर

इसके बाद कुछ वर्षों तक रूपधर के पुत्र- पुत्री के विवाह में समाज के लोगों ने ना तो सहयोग किया और नहीं इसका विरोध किया। लेकिन कुछ वर्षों से एक बार फिर से रूपधर के परिवार को पुरजोर सामाजिक बहिष्कार किए जाने की चेतावनी दी जाने लगी है। इतना ही नहीं, रूपधर के परिवार में होने वाले किसी भी शुभ या अशुभ कार्य में शामिल होने वालों तक को भी यह धमकी दी जा रही है कि किसी ने अगर रूपधर के परिवार से किसी प्रकार का कोई संबंध रखा तो समाज उसके परिवार को भी समाज से बहिष्कृत कर दिया जाएगा कुल मिलाकर इस परिवार को बार-बार अकेले करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे इस परिवार के ऊपर मानसिक दबाव और प्रताड़ना बढ़ने से इनका जीना दुश्वार होने लगा है।

 

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