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आखिर कांग्रेस ने क्यों की महिला आरक्षण बिल पारित करने की मांग ?

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अखिलेश अखिल 
सोमवार से संसद का विशेष सत्र चालू हो रहा है। यह सत्र पांच दिनों तक चलेगा। सरकार को इस  विधेयकों पर चर्चा करनी है और इन विधेयकों को पारित भी करना है। इसके साथ ही कई और मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। लेकिन सत्र से पहले इस बात की भी चर्चा चल रही थी कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए सरकार महिला आरक्षण बिल को पास करा सकती है ताकि विपक्ष के जातिगत गणना वाले दाव को कमजोर किया जा सके। हालांकि इस मुद्दे पर अभी तक बीजेपी मौन है। लेकिन अब कांग्रेस ने अब इस मुद्दे को जोर शोर से उठा दिया है। हैदराबाद में संपन्न हुए कांग्रेस की वर्किंग कमिटी की बैठक में अब इस बात को लेकर प्लानिंग बन गई है कि महिला आरक्षण का मुद्दा चुनाव में भी उठाया जा सकता है। अगर सरकार इस विशेष सत्र में भी महिला आरक्षण बिल को पारित नहीं करवाती है तो कांग्रेस चुनावी अजेंडे में इस बात को शामिल कर सकती है        
     हैदराबाद बैठक के बाद पार्टी नेता जयराम रमेश ने कहा है कि पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस कार्य समिति  ने मांग की है कि महिला आरक्षण विधेयक संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित किया जाना चाहिए।हैदराबाद में दो दिवसीय बैठक के पहले दिन सीडब्ल्यूसी ने अपने प्रस्ताव में 18 से 22 सितंबर तक होने वाले विशेष सत्र में विधेयक को पारित कराने का जिक्र किया है।
 रमेश ने कहा,कांग्रेस कार्य समिति ने मांग की है कि महिला आरक्षण विधेयक संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित किया जाना चाहिए।उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ तथ्यों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि राजीव गांधी ने पहली बार मई 1989 में पंचायतों और नगरपालिकाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था। यह लोकसभा में पारित हो गया लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में विफल हो गया।
उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने अप्रैल 1993 में पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए।उन्होंने कहा, “अब पंचायतों और नगरपालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। यह लगभग 40 प्रतिशत है।”
       रमेश ने कहा कि प्रधान मंत्री के रूप में, डॉ. मनमोहन सिंह संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च, 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। लेकिन इसे लोकसभा में नहीं लिया गया। विधेयक पेश किया गया या राज्य सभा में पारित हो गया तो समाप्त नहीं होगा। महिला आरक्षण विधेयक अभी भी सक्रिय है।
                 सांसद ने कहा, कांग्रेस पार्टी नौ साल से मांग कर रही है कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही राज्यसभा में पारित हो चुका है और अब लोकसभा में भी पारित हो जाना चाहिए।कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने 2008 में इस कानून को फिर से पेश किया, जिसे आधिकारिक तौर पर संविधान (एक सौ आठवां संशोधन) विधेयक के रूप में जाना जाता है।यह कानून 2010 में राज्यसभा द्वारा पारित किया गया था, लेकिन यह लोकसभा में पारित नहीं हो सका और 2014 में इसके विघटन के बाद यह समाप्त हो गया।   
 कांग्रेस की इस मांग से अब बीजेपी की परेशानी बढ़ सकती है। पिछले 9 साल से बीजेपी सत्ता में है। सरकार ने कई तरह के कानून भी बनाये ,कई विधेयकों को भी पास कराया लेकिन महिला आरक्षण बिल को लेकर बीजेपी कभी भी सक्रिय नहीं हुई। अब कांग्रेस चाहती है कि वर्षों की यह मांग मोदी सरकार पूरी करे। लेकिन बीजेपी क्या ऐसा करेगी यह बड़ा सवाल है। बीजेपी को लग रहा है कि सरकार यह बिल पास भी कर देती है तो इसका लाभ उसे नहीं मिल सकता। क्योंकि इस बिल को कांग्रेस ही लेकर आयी थी और बीजेपी सरकार ने इस पर कोई काम नहीं किया। और अब अगर इस बिल को पास किया भी जाता है तो कांग्रेस इसका लाभ उठा लेगी क्यों देश की जनता जानती है कि बीजेपी ने ही इस बिल को लटका रखा है। 

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