जी-20 के बहाने दुनिया भर में सनातन की ब्रांडिंग कर रही प्राचीन भारत की कृतियां

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बीरेंद्र कुमार झा

दिल्ली में आयोजित जी-20 समिट स्थल पर दुनिया भर के राष्ट्रीय अध्यक्षों और उपस्थित मेहमानों को जगह – जगह पर भारत की प्राचीन संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। विदेशी मेहमान भी भारत की इन प्राचीन धरोहरों के साथ फोटो क्लिक करवा रहे हैं और सनातन के रंग में सराबोर हो रहे हैं।कोणार्क का सूर्य मंदिर,नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर,नटराज की मूर्ति देखकर यही लगता है कि जैसे यहां सनातन धर्म की कोई प्रचार सभा चल रही हो। यहां यह केवल कलाकृतियों में ही नहीं दिखता,बल्कि आयोजन स्थल का नाम, थीम का नाम, देश का नाम, नृत्य संगीत आदि को इस तरह से यहां जोड़ा गया है जैसे कि सनातन इस देश देश का ब्रांड बन रहा हो।

यहां आश्चर्यजनक यह है कि इस बार आयोजन स्थल से वैसी कई चीजें गायब हैं जिनसे कभी देश की पहचान कराई जाती थी। जैसे यहां आपको दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारत में से एक ताजमहल की झलक भी देखने को नहीं मिलेगी। चूंकि वह सनातन की पहचान नहीं है, इसलिए परिदृश्य से उसे गायब कर दिया गया है। खान-पान, वेश- भूषा, नृत्य- संगीत कला आदि से ऐसी कोशिश की गई है किआयोजन में सनातन संस्कृति की झलक जरूर दिखे। इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक तीर से दो शिकार किया है।दुनिया को तो अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता से रूबरू कराया ही है, भारत में कुछ पार्टियों जो सनातन के विरोध में उतर आई थी, उन्हें भी उसकी महत्ता समझा दिया है।

भारत मंडपम

सबसे पहले आयोजन स्थल की बात की जाए तो इस आयोजन स्थल का नाम भारत मंडपम है।आयोजन स्थल के संस्कृत नाम से ही उसके सनातन से जुड़े होने का साध संकेत मिलता है। गौरतलब है कि दक्षिण भारत में मंडपम का अर्थ ही मंदिर या गर्भगृह के आगे वाला भाग होता है।भारत मंडपम भगवान बसवेश्वर की अनुभव मंडपम की अवधारणा से प्रेरित है, जो सार्वजनिक सामारोहों के लिए एक मंडप हुआ करता था सनातन को गौरवान्वित करती इसकी डिजाइन शंख के आकार से ली गई है। सनातन में शंख का बहुत महत्व रहा है। मंडपम की दीवारों पर सनातन संस्कृति को उकेरा गया है, जिसमें सूर्य शक्ति और पंचमहाभूत आदि शामिल हैं। सूर्य हमारे प्रमुख देवता रहे हैं और पंच महाभूत ब्रह्मांड के पांच मूल तत्व आकाश,वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को दर्शाते हैं जो सनातन संस्कृति का मूलाधार रहा है।

कोणार्क का सूर्य मंदिर

13वीं शताब्दी में निर्मित कोणार्क के सूर्य मंदिर की जिस तरह से ब्रांडिंग की गई है, उससे लगता है कि इसके जरिए सनातन की ग्लोबल पहचान बनाने का प्रयाश किया जा रहा है। कोणार्क को भारत की एक बड़ी सांस्कृतिक धरोहर माना जाता रहा है, लेकिन अब तक क्या लाइमलाइट में नहीं था ।भारत मंडपम में लगा कोणार्क चक्र भारत के प्राचीन ज्ञान, उन्नत सभ्यता और वास्तु शिल्प कला का उत्कृष्ट का प्रतीक है,
जिसे अब दुनिया जान सकेगी।यह मंदिर सूरज के विशालकाय रथ की तरह बनाया गया है जिसे 7 घोड़े खींचते हैं। इस रथ में 12 जोड़े पहिए लगे हैं। यानी कुल मिलाकर 24 पहिए ।हर पहिए पर शानदार नक्काशी है। ये पहिए हमारी जीवनचर्या से संबंधित कई वैज्ञानिक बातें बताते हैं।

वसुधैव कुटुंबकम

भारत ने जी – 20 समिट के आयोजन का जो सूत्र वाक्य वसुधैव कुटुंबकम रखा है,उसे महा उपनिषद से लिया गया है।इसका अर्थ है पूरा संसार एक परिवार के समान है।चीन ने शुरुआत से ही इसका विरोध किया। उसकी आपत्ति थी कि यह संस्कृत से लिया गया है और संस्कृत यूनाइटेड नेशन की ऑथराइज्ड भाषा नहीं है। इसलिए इसका इस्तेमाल गलत है। वसुधैव कुटुंबकम सनातन कि वह दार्शनिक अवधारणा है जो सार्वभौमिक भाईचारे और सभी प्राणियों के परस्पर संबंध के विचार को पोषित करती है।

नृत्य संगीत

जी – 20 के मेहमानों के स्वागत के लिए रखे गए नृत्य संगीत कार्यक्रम में थीम सॉन्ग वसुधैव कुटुंबकम पर प्रस्तुति में सनातन की स्पष्ट झलक दिखी।प्राचीन शास्त्रीय संगीत वाद्य यंत्रों के साथ-साथ प्राचीन वैदिक संगीत वाद्य यंत्रों, जनजातीय वाद्य यंत्रों और लोक वाद्य यंत्रों का इसमें मेल दिखा,जिसमें देशभर से आए भाग लेने वाले कलाकारों और संगीतकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में वाद्य यंत्र बजाए।आयोजन स्थल पर सुर बहार, जलतरंग , नलतरंग, विचित्र वीणा रूद्रवीणा,सरस्वती वीणा ,डांगरी सुंदरी भपैंग और दिलरुबा जैसे वाद्य यंत्र प्रदर्शित किए गए जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता से ओत प्रोत थे।

नटराज की योग मुद्रा

शिव की पूजा भारत में सनातन काल से हो रही है। आयोजन स्थल भारत मंडपम के सामने बना नटराज का यह स्वरूप शिव के आनंद तांडव का प्रतीक है। नटराज की प्रतिमा में आपको भगवान शिव की नृत्य मुद्रा नजर आएगी शिव एक पांव से राक्षस को दबाए हुए हैं, जिसका अर्थ बुराई के दमन है।शिव अपने नृत्य से सकारात्मक ऊर्जा के संचार का संदेश देते हैं। नटराज की मूर्ति दक्षिण भारत के कई मंदिरों जैसे चिल्लाई नटराज मंदिर उमा महेश्वर मंदिर और बृहदेश्वर मंदिर में स्थापित मूर्तियों से प्रेरणा लेकर बनाई गई है।ये मंदिर चोल साम्राज्य में करीब 9 वीं से 11वीं सदी के बीच बनाए गए थे।

भारत का नाम

जी – 20 समिट में शामिल देशों के राष्ट्राध्यक्षों साथ अपनी पहली बैठक में प्रधानमंत्री के टेबल के आगे रोमन में लिखा हुआ भारत यह संदेश दे गया कि देश की ग्लोबल पहचान अब इंडिया के रूप में नहीं, बल्कि सनातन से चला आ रहा नाम भारत ही अब इस देश की पहचान होगा ।

वाल ऑफ़ डेमोक्रेसी

वाल ऑफ़ डेमोक्रेसी में 5000 साल का लोकतांत्रिक इतिहास बताया गया है यहां लगे 26 स्क्रीन पैनल में अलग-अलग समय की कहानी दिखाई जा रही है।यहां आपको मुगल काल सल्तनत काल की कहानी देखने को नहीं मिलेगी।

वाल ऑफ़ डेमोक्रेसी में विदेशी मेहमान भारत का 5000 साल का लोकतंत्र के इतिहास देखेंगे। इसमें भारतीय संविधान, आधुनिक भारत में चुनाव से लेकर भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी, सिंधु घाटी सभ्यता वैदिक काल, रामायण,महाभारत, महाजनपद और गणतंत्र, जैन धर्म, बौद्ध धर्म ,कौटिल्य और अर्थशास्त्र ,मेगास्थनीज, सम्राट ⁶अशोक, ⁷पाल साम्राज्य के ताम्रपत्र ,श्रेणी संघ, तमिलनाडु का प्राचीन शहर उथमेरारू ,लोकतंत्र का दार्शनिक आधार, कृष्णदेव राय अकबर ,छत्रपति शिवाजी, स्थानीय स्वशासन आदि को शामिल किया गया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाली गीता

जी-20 देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की अगवानी भारत मंडपम में स्वागत द्वार पर गीता एप कर रही है, वह भी शुद्ध भारतीय परंपरा के अनुसार। यह आपकी हर सवाल का जवाब दे रही है। यहां जिंदगी की उलझनों से जुड़ा कोई भी सवाल पूछा जा सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर सवाल का जवाब हमारे सनातन काल से चली आ रहे धार्मिक ग्रंथ गीता की शिक्षाओं के आधार पर देता है। अगर आप गीता की किसी श्लोक का अर्थ जानना चाहते हैं तो यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एप इसे भी आपको बताएगा।

महर्षि

बाजरे के लिए अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने के मकसद से भारत की जी – 20 में मोटे अनार से जुड़ी पहल को महर्षि (मिलेट्स एंड अदर असिएंट गग्रेंस इंटरनेशनल रिसर्च इनीशिएटिव) का नाम दिया गया है। चीन को जी – 20 घोषणा पत्र में इस नाम को शामिल किए जाने पर ऐतराज था। फिर भी भारत ने महर्षि के साथ ही प्रस्ताव पारित करवाया। सनातन संस्कृति सभ्यता में सांसारिक मोह माया को त्याग कर तपस्या में लीन लोगों को महर्षि की संज्ञा दी जाती रही है।

घेरंड संहिता की 32 योग मुद्राएं

जब विदेशी मेहमान अपने देश के राष्ट्रीय झंडों के बीच भारत मंडपम में प्रवेश करते हैं तो उन्हें दीवारों पर अंकित विभिन्न योग मुद्राएं देखने को मिलती है दीवारों पर 32 अनिवार्य योग आसन प्रदर्शित किए गए हैं जो घेरंड संहिता के 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध के पाठ से लिए गए हैं। महर्षि घेरंड ने राजा चांडक पाली को बढ़िया स्वास्थ्य के लिए 32 आसनों शिक्षा दी थी ।संहिता कहती है कि जगत में जितने भी प्राणी हैं,उन सभी की सामान्य शारीरिक स्थिति को आधार बनाकर एक-एक आसन की खोज की गई है।

 

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