बीरेंद्र कुमार झा
18 सितंबर से हो रहे संसद के पांच दिवसीय विशेष सत्र को लेकर भले ही केंद्र सरकार की तरफ से अब तक इसका एजेंडा नहीं बताए गया हो, लेकिन कुछ दिनों तक वन नेशन- वन इलेक्शन की अवधारणा के चर्चा में छाए रहने के बाद अब यह कयास लगाया जा रहा है कि हो न हो इस दौरान केंद्र सरकार संविधान से इंडिया शब्द को विलोपित कर सिर्फ भारत रखने के लिए प्रस्ताव लेकर आ जाय। इस समय देश में इसी बात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है ,क्योंकि इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि जी-20 नेताओं को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से भेजे गए रात्रि भोजन में प्रेसिडेंट ऑफ़ भारत का जिक्र किया गया है।
संविधान सभा ने भारत और इंडिया दोनों को ही बने रहने की दी सहमति
गौरतलब है की भारतीय संविधान के अनुच्छेद एक में हमारे देश का उल्लेख इस प्रकार किया गया है कि इंडिया जो भारत है एक राज्यों का संघ होगा।इस देश का नामकरण बहुत लंबे बहस के बाद किया था, क्योंकि कुछ सदस्य इस देश का नाम इंडिया रखना चाहते थे और कुछ इस भारत रखना चाहते थे।इससे इतर आर्यावर्त और अन्य कई नाम भी चर्चा में आए और चर्चा में ही सिमट के रह गए, लेकिन इंडिया और भारत पर जोर बराबर का था,लिहाजा संविधान के आर्टिकल 1 में इस देश के लिए दोनों ही नामों को समतुल्यता प्रदान करते हुए उल्लेखित कर दिया।
गुलामी का प्रतीक माना जा रहा इंडिया को
संविधान सभा ने भले ही भारत और इंडिया दोनों को अनुच्छेद 1 के जरिए संविधान में जगह दिया,देश लेकिन देश के लोग इंडिया और भारत के बीच बाते रहे।एलिट भारतीयों का एक समूह इस देश का नाम इंडिया रखे का पक्षधर हैं तो दूसरी तरफ जन सामान्य का एक बड़ा वर्ग इस देश का नाम इंडिया रखे जाने से नाराज चल रहे हैं। वे इसे गुलामी का प्रतीक मानते हैं।इस वर्ग के लोग इस देश का नाम भारत रखना चाहते हैं और इसके लिए ये संविधान से इस देश के लिए इंडिया नाम हटाकर इसे सिर्फ भारत करने के के लिए समय-समय अपनी आवाज बुलंद करते रहते हैं l। बीजेपी और दक्षिणपंथी सोच रखने वाले राजनीतिक दल,व्यापारिक संस्थान और एनजीओ इनकी संख्या और वोटिंग या अर्निंग क्षमता को देखते इन्हें इस देश का नाम सिर्फ भारत रखने के लिए भड़काते भी रहते हैं।खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भी इस देश का नाम इंडिया को हटाकर सिर्फ भारत रखना चाहते हैं ।2022 में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से गुलामी के निशान को खत्म करने सहित कुछ प्रतिज्ञा लेने को कहा था। यह बात भी प्रधानमंत्री का झुकाव इस देश का नाम भारत की तरफ होने की तरफ इशारा कर रहा था।
क्यों लग रहे हैं इस बात के कयास
इस देश का नाम इंडिया की जगह सिर्फ भारत करने के कयास दो वजह से लग रहे हैं। एक वजह हिमंत विश्वा शर्मा की एक्स पर की गई हालिया पोस्ट जिसमें उन्होंने लिखा है कि भारत गणराज्य खुश और गौरवान्वित है कि हमारी सभ्यता साहसपूर्वक अमृतकाल की ओर आगे बढ़ रही है।दूसरा वजह है राष्ट्रपति की ओर से जी – 20 प्रतिनिधिमंडल को भेजे गए रात्रि भोज निमंत्रण पत्र।राष्ट्रपति भवन से जी-20 प्रतिनिधिमंडल को दिए गए आधिकारिक रात्रि भोज निमंत्रण में राष्ट्रपति का उल्लेख प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया के बजाय प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखकर किया गया है। कांग्रेस नेता जय राम रमेश ने डिनर आमंत्रण में बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नाम बदलने की खबर सच लग रही है।
कई बार उठ चुकी है मांग
इस देश का नाम इंडिया से भारत करने की मांग कई बार उठ चुकी है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत देसी ल भी इस विचार का समर्थन कर चुके हैं इस कदम को गुलामी वाली विरासत से दूर जाने का एक और प्रयास करार दिए जाने की संभावना है विशेष रूप से या बदलाव ऐसे समय में आ सकता है जब 28 सदस्य विपक्षीय रूप जो लोकसभा 2024 का चुनाव एक साथ लड़ने की योजना बना रहा है उसने अपना नाम भारतीय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक समावेशी गठबंधन (INDIA)इंडिया रखा है।इस घटनाक्रम से सरकार और विपक्ष के बीच नए सिरे से जंग पैदा हो सकती है।

