भारत का सोलर मिशन आदित्य एल 1आज होगा लांच

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बीरेंद्र कुमार झा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)अपने पहले सौर मिशन आदित्य एल 1को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।चंद्रयान 3 की सफलता के बाद अब लोगों की निगाहें और उम्मीद आदित्य L1 पर टिकी हुई है। शनिवार सुबह 11:50 पर आदित्य L1 को श्रीहरिकोटा से लांच किया जाएगा।15 लाख किलोमीटर की यात्रा कर आदित्य L1 अंतरिक्ष के उस झरोखे, लैंग्रेज पॉइंट 1तक पहुंचेगी जहां से सूरज को बेहद साफ और स्पष्ट तरीके से देखा जा सकता है। एल 1 पॉइंट पर पहुंचकर मिशन पहली बार अपने निकटतम तारे और उसके आसपास के विभिन्न डेटा और पहलुओं का अध्ययन करेगा।आदित्य एल 1 सौर कोरोना पर डाटा के साथ-साथ विजुअल ईमिशन लाइव का भी अध्ययन करेगा। इस काम के लिए आदित्य एल 1 में उन्नत उपकरण लगे हैं।

बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ एस्ट्रोफिजिक्स में तैयार हुआ है पेलोड

आदित्य एल1 के जरिए अंतरिक्ष में विजिबल एमिशन लाइन क्रोरोनोग्राफ पेलोड ले जाया जायेगा।यह पेलोड सौर कोरोना पर डाटा के साथ-साथ विजुअल ईमिशन लाइव का भी अध्ययन करेगा।यह पेलोड बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ एस्ट्रोफिजिक्स के प्रोफेसर जगदेव सिंह के प्रारंभिक प्रयास के परिणामस्वरूप विकसित किया गया है।

प्रारंभिक योजना 800 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की पहली कक्षा थी

जगदेव सिंह इस सोलर मिशन आदित्य एल 1 के आज हो रहे लॉन्चिंग को लेकर खासे उत्साहित हैं।उन्होंने बताया कि आदित्य एल 1 सूर्य का अध्ययन करने के लिए भारत का पहला समर्पित वैज्ञानिक मिशन है। प्रारंभिक योजना इसे 800 किलोमीटर की निचली पृथ्वी कक्षा में लॉन्च करने की थी, लेकिन 2012 में इसरो के साथ चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि मिशन को एल1 ( langraej point 1) के चारों ओर एक हेलो कक्षा में डाला जाएगा जो कि पृथ्वी से सूरज की ओर 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

सूरज के विभिन्न पहलुओं का करेगा अध्ययन

जगदेव सिंह ने बताया कि इस मिशन के साथ हम सूरज के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने में सक्षम होंगे, जिसमें तापमान प्लाज्मा भी शामिल है। प्लाज्मा तापमान इतना अधिक क्यों हो जाता है? ऐसी कौन सी प्रतिक्रिया है जिसके कारण ठंढा प्लाज्मा गर्म हो जाता है ?आदि का अवलोकन करने में हम सक्षम हो पाएंगे। यह हमें पृथ्वी तक पहुंचने वाले कोरोना मास इजेक्शन (CME ) के सटीक समय और गति की सटीक भविष्यवाणी करने में भी मदद करेगा । यह मौसम पूर्वानुमान या आपदा चेतावनी की तरह होगा।

कैसे शुरू हुआ सोलर मिशन अभियान

आदित्य एल्बम मिशन की यात्रा को लेकर जगदेव सिंह ने बताया कि इस मिशन की शुरुआत 2012 में ही हो गई थी, लेकिन इसे अब लॉन्च किया जा रहा है।जगदेव सिंह ने कहा कि 16 फरवरी 1980 को भारत में सूर्य ग्रहण हुआ था और उस समय इस संस्थान के संस्थापक निदेशक एमके वेणु बप्पू ने मुझे सूरज के बाहरी वातावरण का अध्ययन करने के लिए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया था। मैंने 1980 और 2010 के बीच 10 ऐसे अभियान चलाए।मुझे एहसास हुआ कि ग्रहण के दौरान आपको केवल पांच- सात मिनट तक ही अध्ययन करने का अवसर मिल सकता है। यह व्यवस्थित लंबे समय की रिसर्च को सीमित करता है । यह रिसर्च ज्यादा दिनों तक नहीं हो पाता है। मैं निरंतर अवधि के लिए सूरज के पहलुओं का अध्ययन करने में मदद करने के लिए मिशन के लिए इसरो और अन्य एजेंसियों में कई लोगों से बातचीत की। 2009 के आसपास ऐसे संभावित मिशन के बारे में बातचीत शुरू हुई और बाद में 2012 में एक ठोस योजना विकसित की गई।

क्या होगी इस आदित्य एल 1मिशन की अवधि

मिशन की अवधि को लेकर जगदेव सिंह ने बताया कि इसमें 127 दिन लगने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यान को लैंग्रेज पॉइंट 1 तक पहुंचने में 127 दिन लगेंगे और फिर हम कुछ परीक्षण करेंगे। उम्मीद है कि अगले साल फरवरी या मार्च तक डाटा आना शुरू हो जाएगा। आमतौर पर एक उपग्रह को 5 साल तक रहने की योजना बनाई जाती है जो की न्यूनतम मिशन लाइफ है, लेकिन यह हमें 10 से 15 साल तक डाटा प्रदान करना जारी रख सकता है।

सूर्य का लगातार डाटा पाने वाला भारत होगा पहला देश

जगदेव सिंह ने कहा कि चूंकि इस उपग्रह को एल 1 पर रखा जाएगा जो एक स्थिर बिंदु है, इसलिए वहां हमें बहुत अधिक परिश्रम नहीं करना होगा।वह कक्षा स्थिर होगी। इसलिए हम इस मिशन की लाइफ के अधिक होने की उम्मीद कर रहे हैं।यह पहली बार है जब हम सौर कोरोना, प्लाज्मा के गर्म होने और क्रोमोस्फीयर से कोरोना तक ऊर्जा के ट्रांसफर की भूमिका पर अध्ययन कर पाएंगे। हम शानदार डाटा को हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं। अब तक कोई भी लगातार इस तरह डाटा हासिल करने में कामयाब नहीं हुआ है।

 

 

 

 

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