और एक नेता की जिद्द ने भारतीय कुश्ती संघ को ही तहस नहस कर दिया ——

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New Delhi: Wrestlers Vinesh Phogat, Sakshi Malik and Sangita Phogat during their protest at Jantar Mantar, in New Delhi, Thursday, April 27, 2023. (PTI Photo/Manvender Vashist Lav)(PTI04_27_2023_000155B)


अखिलेश अखिल 
यह कितनी बड़ी बात है कि समय पर भारतीय कुस्ती संघ के प्रमुख का चुनाव नहीं हुआ और कुश्ती की अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भर्ती कुश्ती संघ को ही निलंबित कर दिया। अब भारत के पहलवान भारतीय कुश्ती संघ की तरफ से और तिरंगा को फहराते हुए नहीं  कुश्ती नहीं लड़ पाएंगे। भारतीय खिलाडियों को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के बैनर के तहत ही लड़ना होगा। भारत का कही को नाम नहीं होगा और तिरंगा का शान भी नहीं बढ़ेगा।    
 यह सब दो दिन पहले की कहानी है। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक ने गुरुवार को भारतीय कुश्ती के लिए काला दिन बताया, क्योंकि खेल की राष्ट्रीय संस्था को अंतर्राराष्ट्रीय संस्‍था यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने समय पर चुनाव न कराने के कारण निलंबित कर दिया है। बता दें कि युवा मामले और खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ ने बजरंग, साक्षी और विनेश के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पहलवानों की नियुक्ति के बाद दिन-प्रतिदिन के कार्यों के संचालन के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया है, जिसके बाद से भारतीय कुश्ती महासंघ अधर में है।               बता दें कि  विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक ने डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न और समग्र कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए दिल्ली में जनता मंतर पर धरने पर बैठे थे। बहुत से नाटक हुए। एक तरह महिलों के समर्थन में  खड़ा रहा और दूसरी तरफ बीजेपी का सांसद सरकार की ताकत को दिखाते हुए खिलाडियों पर तंज कसता रहा। सांसद के खिलाफ कई मामले भी दर्ज हुए लेकिन दिल्ली पुलिस की तरफ से आज तक गिरफ्तारी नहीं हुई। सांसद की गिरफ्तारी होगी यह नहीं यह तो अब आधार की बात है लेकिन इस सांसद ने यथा तो दिखा ही दिया कि वह नहीं तो संघ ही नहीं। 
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा चुनावों के खिलाफ अंतरिम रोक लगाए जाने के कारण नए प्रशासकों को चुनने के लिए चुनावों में और देरी हो गई। भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनावों में देरी होने के कारण यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने गुरुवार को भारतीय संस्था को निलंबित कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय पहलवानों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में यूडब्ल्यूडब्ल्यू ध्वज के तहत लड़ना होगा। साक्षी और बजरंग दोनों ने कहा कि बृज भूषण शरण सिंह के कारण भारतीय पहलवान अब राष्ट्रीय ध्वज के नीचे प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। उन्‍होंने लिखा, “आज भारतीय कुश्ती के लिए एक काला दिन है। बृजभूषण और उनके साथियों के कारण देश के पहलवान तिरंगे के साथ भाग नहीं ले पाएंगे। राष्ट्रीय ध्वज देश का गौरव है और इसके साथ स्टेडियम की विजयी गोद ले रहा है।”
साक्षी और बजरंग पुनिया दोनों ने सोशल मीडिया साइट पर लिखा, “तिरंगा हर खिलाड़ी का सपना है। बृजभूषण और उनके लोगों ने देश को कितना नुकसान पहुंचाया है, यह दुनिया देख रही है।”
यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग द्वारा डब्ल्यूएफआई को निलंबित करने के साथ अब यह आईओए द्वारा नियुक्त समिति पर निर्भर है कि वह रास्ता साफ करे और जल्द से जल्द चुनाव कराए, ताकि वे निलंबन हटवा सकें। हालांकि न तो बृजभूषण और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य मैदान में है, लेकिन उनके करीबी सहयोगी संजय सिंह ने शीर्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था।

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