मणिपुर में फिर हिंसा ,कुकी और मैतेई उग्रवादी आमने -सामने ,तीन कुकी की मौत !

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अखिलेश अखिल 

मणिपुर से दूर दिल्ली में सब कुछ शांत है। यहाँ लगातार आगामी चुनाव को लेकर बैठके चल रही है। बीजेपी की राजनीति सत्ता का विस्तार करना है तो विपक्ष की राजनीति बीजेपी की विस्तारवादी राजनीति पर लगाम लगाने की है। लेकिन यहाँ से मीलों दूर मणिपुर आज  भी  खून से सराबोर हो रहा है। वैसे तो वहां पिछले तीन महीने से खुनी खेल जारी है लेकिन आज सुबह जिस तरह की हिंसा हुई है उससे साफा लगता है कि मैतेई और कुकी के बीच अब बड़ी दिवार खिंच गई है। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि राज्य की बीजेपी की सरकार कुछ नहीं कर रही है लेकिन सच यही है कि सरकार का अब प्रशासन से नियंत्रण ख़त्म हो गया है और कोई भी समुदाय सरकार की मशीनरी को मानाने को तैयार नहीं है। 
             सूत्रों के मुताबिक, सुबह करीब 5.30 बजे उखरुल जिले के लिटन पुलिस स्टेशन के अंतर्गत थवई कुकी गांव में संदिग्ध मैतेई सशस्त्र बदमाशों और कुकी स्वयंसेवकों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें तीन कुकी लोगों के मारे जाने की खबर है। बीएसएफ सहित सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बताई गई है। सूत्रों के मुताबिक, मैतेई उपद्रवियों ने सबसे पहले गांव के ड्यूटी पोस्ट पर हमला किया, जहां स्वयंसेवक गांव की सुरक्षा के लिए ड्यूटी कर रहे थे। इस गोलीबारी में कुकी स्वयंसेवकों के तीन लोगों के मारे जाने की खबर है।              
            उल्लेखनीय है कि यह गांव मैतेई आबादी क्षेत्र से काफी दूर स्थित है। निकटतम मेइतेई निवास यिंगांगपोकपी में है जो घटना स्थल से 10 किलोमीटर से अधिक दूर है। बताया जा रहा है कि घटनास्थल से 37 बीएन बीएसएफ (महादेव) करीब पांच से छह किलोमीटर दूर है। घटना के बाद बीएसएफ सहित अन्य सुरक्षाबल मौके पर पहुंच गए हैं। सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
               बता दें कि मणिपुर में बहुसंख्यक मैतई समुदाय जनजातीय आरक्षण देने की मांग कर रहा है। इसकी वजह ये है कि मैतई समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है लेकिन ये लोग राज्य के सिर्फ 10 प्रतिशत मैदानी इलाके में रहते हैं। वहीं कुकी और नगा समुदाय राज्य के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं जो की राज्य का करीब 90 फीसदी है। जमीन सुधार कानून के तहत मैतई समुदाय के लोग पहाड़ों पर जमीन नहीं खरीद सकते, जबकि कुकी और नगा समुदाय पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। यही वजह है, जिसकी वजह से हिंसा शुरू हुई और अब तक इस हिंसा में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

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