न्यूज़ डेस्क
पाकिस्तान में चीनी लोग लगातार निशाने पर हैं। पकिस्तान का बलूचिस्तान इलाका चीनियों का कब्रगाह बनता जा रहा है। सच ये भी है कि चीनियों के चक्कर में पाकिस्तानी सैनिक भी मारे जा रहे हैं। हर दिन बलूचिस्तान में बम फट रहे हैं और इसमें चीनी लोग मारे जा रहे हैं। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले बलूचिस्तान में हुए एक आईईडी बम धमाके में चार चीनियों के हलाक होने के चर्चा है। इसके साथ नौ पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए। बीएलए ने 90 दिन के भीतर चीन को बलूचिस्तान खाली करने की धमकी दी है। एक जारी टेप में कहा है कि अगर खाली नहीं किए तो फिर और हमले होंगे ।
हालिया धमाका उस समय हुआ जब बुलेट प्रुफ गाड़ी में 23 चीनी इंजीनियरिंग टीम ग्वादर शहर से गुजर रही थी। अब सवाल उठता है कि जम्मू कश्मीर के मसले पर गलबहिंया करने वाले चीन और पाकिस्तान बलूचिस्तान में ही इतनी नफरत कौन और क्यों कर रहा है?
बलूचिस्तान की आजादी की मांग को लेकर स्थानीय नागरिकों ने बलूच लिबरेशन आर्मी का गठन किया। अब यही आर्मी पाकिस्तान के लिए मौत का द्वार खोले हुए है। कभी बलूचों के निशाने पर पाकिस्तानी सेना हुआ करती थी अब चीनी हैं। दरअसल पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में चीन को कई प्रोजेक्ट सौंप दिए हैं और बलूचिस्तान इसका लगातार विरोध कर रहा है। यही वजह है कि चीनी अब बलूचों के निशाने पर हैं। ग्वादर पोर्ट भी यहीं है और चीन इसे विकसित करने में लगा हुआ है। बीएलए चीन का विरोध कर रहा है।
बलूचों का मानना है कि चीनी यहां के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। बलूचों की माने तो यहां प्राकृतिक संसाधनों की भरमार हैं। सोने जैसी कीमती कई धातुएं इस क्षेत्र हैं। चीनियों के आने से यहां सोने का उत्पादन बढ़ गया है। यहां पाक की सबसे बड़ी गैस फील्ड है। चीन यहां विस्तारवादी नीति के तहत काम कर रहा है। यही प्रांत के लिए मुसीबत है। सबसे ज्यादा खनिज वाला प्रदेश पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा प्रांत है। यही वजह है कि यह लगातार पाकिस्तान से ही अलग होने का प्रयास कर रहा है।
