न्यूज़ डेस्क
अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने इस बात को स्वीकार किया है मणिपुर में तांडव हुआ है और इसे कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसका सबसे ज्यादा दुःख हमें हुआ है। यह घटना शर्मनाक है लेकिन घटना पर राजनीति करना उससे भी ज्यादा शर्मनाक हैं.”
मणिपुर की वायरल वीडियो वाली घटना पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “4 मई की दुर्घटना शर्मनाक है लेकिन संसद सत्र के एक दिन पहले ही ये वीडियो क्यों आया। जिसने ये वीडियो फैलाया उसे तब ही इसे पुलिस को देना चाहिए था। जिस दिन वीडियो मिला उसी दिन 9 लोगों की पहचान कर पकड़ा और अब वो ट्रायल का सामना कर रहे हैं।
अमित शाह ने कहा, “1993 में नागा-कुकी संघर्ष में 700 लोग मारे गए थे। तब गृह राज्य मंत्री ने संसद में बयान दिया था, प्रधानमंत्री या गृह मंत्री ने नहीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “कांग्रेस नेता राहुल गांधी मणिपुर दौरे के दौरान सड़क मार्ग से जाने की जिद पर अड़े रहे जबकि वह शांति से हवाई मार्ग से जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “ऐसा समय राजनीति करने का नहीं होता है यह बात विपक्ष को समझनी चाहिए।
अमित शाह ने कहा, “पहले दिन से मैं मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार था लेकिन वे चर्चा नहीं चाहते थे, वे केवल विरोध करना चाहते थे। अगर वे मेरी चर्चा से असंतुष्ट थे, तो वे पीएम से बोलने के लिए कह सकते थे। लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं पहले दिन से ही मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार था लेकिन विपक्ष कभी चर्चा नहीं करना चाहता था। विपक्ष नहीं चाहता कि मैं बोलूं लेकिन वे मुझे चुप नहीं करा सकते। 130 करोड़ लोगों ने हमें चुना है इसलिए उन्हें हमारी बात सुननी होगी। हमारी सरकार के पिछले छह वर्षों के दौरान, कर्फ्यू की आवश्यकता कभी नहीं पड़ी।
अमित शाह ने कहा, “मोदी सरकार के आने के बाद मणिपुर में हिंसक घटनाएं कम हुई हैं। विपक्ष मणिपुर पर चर्चा नहीं चाहता है। मणिपुर हिंसा को लेकर विपक्ष की तरफ से कई तरह की अफवाहें फलाई गई। 6 साल में मणिपुर में एक भी दिन कर्फ्यू नहीं लगा। शाह ने विपक्ष की तरफ से टोके जाने पर कहा, विपक्ष को देश के गृह मंत्री को सुनना पड़ेगा। आप मुझे बीच में नहीं रोक सकते. 130 करोड़ की जनता ने हमें चुन के यहां भेजा है।

