अखिलेश अखिल
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कल एक बड़ी बात कह दी। मौका था राजस्थान में 50 जिलों के उद्घाटन का। सीएम बड़े प्रसन्न थे। मजमा खूब था। जयकारे भी लग रहे थे। कांग्रेस के झंडे ,डंडे से महफ़िल सजी हुई थी। नेताओं की भीड़ थी और जनता में उम्मीद की आस। सीएम गहलोत भीड़ को देखकर फुले न समाये। मन प्रसन्न हुआ तो कुछ फकरीराना लफ्ज निकने लगे। वे कबीर जैसे फ़क़ीर की तरह खुद को बताने लगे। खुद की बकरोक्ति अलंकार का प्रयोग किया। बातें अपने बारे में की और निशाने पर पीएम मोदी रहे।
गहलोत ने कहा कि उनसे बड़ा फ़क़ीर भला कौन हो सकता है ? उन्होंने खुद की तुलना पीएम मोदी से भी की। गहलोत ने तुलनात्मक दृष्टि से पीएम मोदी को अपने से अमीर बताया और कहा कि मेरे पास तो सचमुच में कुछ भी नहीं है। परिवार जरूर है लेकिन अपना तो कुछ भी नहीं। दिन में एक ही कपडा पहनते हैं। फिर धोकर इसका फिर से इस्तेमाल करते हैं लेकिन क्या प्रधानमंत्री मोदी ऐसा करते हैं ? वे तो दिन में कई कपडे बदलते हैं और जो पहनते हैं उसे फिर से हाथ लगते नहीं। अब आप ही बताइये कि बड़ा फ़क़ीर कौन है ?
बता दें कि पीएम मोदी भी कई बार खुद को फ़क़ीर बताते रहे हैं। वे कहते रहे हैं कि उनका क्या है ? जब चाहेंगे झोला उठाकर चल देंगे। वे तो फ़क़ीर हैं। फकीरों का अपना क्या ? उन्हें न कोई लोभ है और लालच न कोई परिवार है। यह देश की उनका परिवार है। पीएम मोदी ये बयान अक्सर देते रहे हैं। देश के लोग भी कहते हैं कि उनके पास क्या है ? परिवार भी तो नहीं है। फिर यह बन्दा गलत क्यों करेगा ? लेकिन अब गहलोत ने पीएम मोदी की फैक्री को चुनौती दे डाली है। वे खुद को बड़ा फ़क़ीर मान बैठे हैं।
आखिर फ़क़ीर का मतलब क्या होता है ? यह जानना भी जरुरी है। हिंदी व्याकरण को पढ़िए तो फ़क़ीर के मायने दिय गए हैं। सांसारिक विषयों का त्याग करने वाला व्यक्ति; साधु; संत; महात्मा ,भजन करके गुज़ारा करने वाला मुसलमान साधु , बहुत गरीब या कंगाल व्यक्ति , भीख माँगने वाला व्यक्ति; भिखमंगा और भिक्षुक।
अगर इन शब्दों को देखा जाए तो कम से कम पीएम फ़क़ीर तो नहीं ही है। और फिर गहलोत को बह फ़क़ीर नहीं कहा जा सकता। हो सकता है इनके बैकग्राउंड गरीबी वाले हों लेकिन निजी जिंदगी तो अमीरी वाले ही है। और राजनीति में गरीब कौन हैं ? कुछ लोग ऐसे हो सकते हैं जो भ्रष्टाचार से मुक्त हों। क्योंकि अमीरी तो उसी रास्ते से आती है। लेकिन नेताओं में लोभ और लालच का खत्म नहीं होता। और फिर जो लोभी है ,लालची है उसे फ़क़ीर कैसे कहा जा सकता है ? फ़क़ीर तो ईश्वर के सहारे जीता है। जो मिल गया वही बहुत है। नहीं मिला तो इस्वर का नाम लेकर आगे बढ़ गए। इस संसार का सबसे बड़ा फ़क़ीर तो महादेव हैं। पूरा संसार उन्ही का है लेकिन उनका कुछ भी नहीं। फिर भी सबको देते ही रहते हैं। देने वाला ही सबसे बड़ा फ़क़ीर हो सकता है। इंसान के बस में फकीरी कहाँ ?
अब सीम गहलोत पर कुछ और भी बातें। उन्होंने जयपुर में कहा कि मैं मोदीजी से बड़ा फकीर हूं। आपने देखा होगा मोदीजी एक बार जो ड्रेस पहन लेते हैं तो वो रिपीट नहीं करते हैं। मैं दिन में एक ही ड्रेस रखता हूं। मैं फकीर नहीं हूं क्या? उन्होंने आगे कहा कि मेने अपने जीवन में आज तक एक प्लाॅट नहीं खरीदा है। एक फ्लैट नहीं खरीदा है। मैंने आज एक ग्राम सोना नहीं खरीदा है। वो मुझसे बड़े क्या फकीर होंगे।
सीएम गहलोत ने कहा कि मेरी बेटी की शादी हुई तो मेरी वाइफ ने 90 हजार के चैक दिए होंगे। उन्होंने कहा कि 40 साल पहले 90 हजार का प्लाॅट मानसरोवर में मिला था वो प्लाॅट 10 की किस्तों में दिया। एमपी को दिल्ली में फ्लैट मिलता है, वह द्वारका में है। उसका कोई 15 हजार किराया आता है, उसकी 15 साल तक किस्तें चुकाईं। उन्होंने कहा कि मैं आज तक एक ग्राम सोना नहीं खरीदा है। वो मुझसे बड़े क्या फकीर होंगे।
सीएम ने अपनी फकीरी की तुलना पीएम की फकीरी से करते हुए कहा कि उनका चश्मा ढाई लाख का है। मुझसे क्या सुनना चाहते हैं वो? पहले राहुल गांधी ने नहीं कहा था सूट-बूट की सरकार। जब पहली बार पीएम बने तो लंदन से 10 लाख सूट बनकर आया था। जैसे ही राहुल गांधी ने सूट-बूट की सरकार कहा उन्हें वह सूट बेचना पड़ा। सीएम ने आगे कहा कि पिछले दिनों लाभार्थी संवाद के दौरान एक लाभार्थी ने कहा कि बार-बार आप ही सीएम बनो। मैंने कहा कि धापू देवी जी मैं सीएम का पद छोड़ना चाहता हूं, लेकिन यह पद मुझे नहीं छोड़ रहा। यह कहने में आदमी को हिम्मत चाहिए कि मैं पद छोड़ना चाहता हूं, पर पद मुझे नहीं छोड़ रहा।उन्होंने मीडिया के साथियों से संबोधित करते हुए कहा कि इस बात का मतलब यह मत निकालना कि मैं चलते हुए कुछ भी बोल दे रहा हूं। मैं राजनीति में हर शब्द सोच समझकर बोलता हूं।

