बीरेंद्र कुमार झा
जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के मसले पर सियासत आज भी हो रही है। मामला सर्वोच्च अदालत में भी है,लेकिन इसकी समाप्ति की घोषणा के 4 साल बाद घाटी की आबोहवा काफी बदली बदली सी लगती है।आतंक के नए स्रोत और तरीकों की चुनौती के बीच घाटी में आतंकी घटनाओं में कमी आई है। इसके साथ ही विकास के काम में तेजी के साथ सरकार निचले स्तर तक लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम में जुटी हुई है।
घाटी में आतंक के आकाओं पर नकेल और वित्तीय स्रोत पर एनआईए सहित अन्य एजेंसियों के चौतरफा प्रहार से तस्वीर काफी हद तक बदली है। खौफ की कमी के चलते ही दशकों बाद निकले मोहर्रम के जुलूस को सरकार भरोसा बहाली का बड़ा प्रतीक बता रही है। वहीं जी-20 का आयोजन और घर-घर तिरंगा जैसे अभियान की घाटी में मिली सफलता को सरकार बड़े बदलाव का निशानी मानती है।एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अलगाववादियों की कमर टूट चुकी है। आतंकी नाम बदलकर घाटी में जीने को मजबूर हैं।हालांकि हाइब्रिड आतंकी टारगेट और कट्टरपंथ के नाम पर युवाओं को आजाद कश्मीर की मांग के लिए गुमराह करने जैसी चुनौती भी अधिकारी स्वीकार कर रहे हैं।
घाटी के बजाय जम्मू की तरफ आतंकियों का मूवमेंट और सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और पैसा भेजने की हरकत में बढ़ोतरी सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती है।अधिकारियों का कहना है कि अरसे से चल रहा आतंकवाद रातो रात खत्म नहीं हो सकता, लेकिन आज घाटी में आम लोग बदलाव महसूस कर रहे हैं ।उनका डर खत्म हो रहा है। चुनिंदा लोगों की आतंकवादियों से सहानुभूति की तुलना में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो विकास और शांति के पक्षधर हैं।अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिल रहा है।
मोहर्रम का जुलूस निकला
90 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद फैलने के बाद से ही वहां मोहर्रम का जुलूस नहीं निकल रहा था। अब जुलूस निकालने और इस दौरान कोई घटना नहीं होने को अधिकारी कश्मीर में सामान्य हालत होने का एक और पुख्ता सबूत मांगते हैं।
निवेश बढ़ा ,परियोजना में तेजी आई
गृह मंत्रालय ने संसद को बताया कि जम्मू कश्मीर में वर्ष 2022 में 92260 परियोजनाएं पूरी हुई, जबकि अनुच्छेद 370 के युग 2018- 19 में 9229 परियोजनाएं ही पूरी हुई थी।मंत्रालय ने बताया कि जम्मू कश्मीर में निवेश भी 10 गुना बढ़ गया है, जो 2019-20 में ₹296 से बढ़कर 2022- 23 में ₹2153 हो गया है। 35 लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ।जीएसटी,राजस्व और अन्य कर संग्रह ₹9310.99 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पिछले 3 वर्षों के दौरान 6912 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है। पिछले 4 वर्षों के दौरान 19096 किलोमीटर सड़क को ब्लैक टॉप किया गया है।
एक्सप्रेसवे और रिंग रोड से कारोबार बढ़ेगा
सरकार का मानना है कि 5 एक्सप्रेसवे ,जम्मू और श्रीनगर शहरों के लिए रिंग रोड ,10 प्रमुख और 11 अन्य सुरंगों, सहित 33 फ्लाईओवर पर काम चल रहा है। इससे कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। जम्मू कश्मीर में सौभाग्य योजना के तहत एक सौ प्रतिशत विद्युतीकरण कर लिया गया है। वर्ष 2021 में 1.13 करोड़ की तुलना में 2022 में पर्यटकों की संख्या 1.88 करोड़ से अधिक पहुंचने का दावा किया है।
ड्रोन के जरिए घुसपैठ की चुनौती
जमीनी घुसपैठ पर सुरक्षा ग्रिड के जरिए नकेल कसने के बाद पाकिस्तान ड्रोन के जरिए बार-बार अतिक्रमण कर रहा है।वर्ष 2022 में 268 से अधिक ड्रोन जबकि 2021 में 109 और 2020 में 49 ड्रोन देखे गए थे।
आतंकी घटनाओं में आई कमी
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी में 78% तक आतंकी घटनाओं में कमी का दावा सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा किया जा रहा है।आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 से 4 अगस्त 2019 तक की अवधि के मुकाबले 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद से आतंकी घटनाओं में 30% से ज्यादा की कमी आई है। सुरक्षा बलों और नागरिकों की मौत में 42% तक की कमी आई है। अकेले सुरक्षाबलों के जवानों के शहीद होने की घटनाओं में 57% तक की कमी आई है।जम्मू कश्मीर घाटी में 30,000 से ज्यादा जनप्रतिनिधि काम कर रहे हैं।
आतंक की नई चुनौती
आतंकी संगठनों द्वारा जैस ए मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और अल बद्र का छद्म रूप तैयार कर लिया गया है। जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक काम कर चुके बीएसएफ के पूर्व एडीजी पीके मिश्रा का कहना है कि जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाएं कम हुई है।आतंकी संगठनों के आर्थिक स्रोत पर प्रहार के बाद अब चुनौती नए नाम से काम कर रहे संगठन और उसकी बदली हुई रणनीति से है।
एक के बदले 5 एनकाउंटर
जम्मू कश्मीर में आतंकी हमलों में 1 जवान शहीद होता है तो उसके बदले में 5 आतंकियों को ढेर कर दिया जाता है। पिछले साल आतंकी हमलों में 31 जवान शहीद हुए थे।इसके बदले में सुरक्षाबलों ने 172 आतंकियों को मार गिराया था ।

