बीरेंद्र कुमार झा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज दिल्ली सेवा विधेयक पर कहा कि लोकसभा में अध्यादेश लाकर सरकार ने कोई गलत काम नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि सरकार जल्दी से जुड़े किसी भी मामले में कानून बना सकती है। अमित शाह ने चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली न पूर्ण राज्य है और न ही पूर्णसंघ शासित प्रदेश है। हमें दिल्ली को लेकर कानून बनाने का अधिकार है।
बीजेपी और कांग्रेस की सरकारें झगड़ा नहीं करती थी
दिल्ली में कांग्रेस और बीजेपी की सरकारें आई और दोनों में से किसी दल ने एक दूसरे के साथ झगड़ा नहीं किया, लेकिन 2015 में दिल्ली में ऐसी सरकार आई जिसका मकसद सेवा करना नहीं, केवल झगड़ा करना है। उससे पहले बीजेपी और कांग्रेस की सरकरें केंद्र में रही, लेकिन इनका आपस में कभी झगड़ा नहीं हुआ क्योंकि वे सेवा भाव से कामकाज कर रही थी।लेकिन 2015 में दिल्ली में जो सरकार आई उसका उद्देश्य देश सेवा करना नहीं ,बल्कि झगड़ा करना है ।मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है।
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पट्टाबी सीतारमैया समिति की दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की सिफारिश का पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, डॉ राजेंद्र प्रसाद और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने विरोध किया था। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली न तो पूर्ण राज्य है औरऔर ना ही संघ शासित प्रदेश है। राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते संविधान के अनुच्छेद 239 में इसके लिए अलग प्रावधान है, जिसके तहत संसद दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र से संबंधित किसी भी विषय पर कानून बना सकती है।
अगले चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे विजेता
दिल्ली सेवा बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस से अपील की कि वे अपने गठबंधन की न सोचें बल्कि दिल्ली की जनता की सोचें। जनता के हित के लिए उन्हें बीजेपी के साथ जाना चाहिए ना कि अपने गठबंधन का सोचना चाहिए ।विपक्षी गठबंधन पर हमला बोलते हुए उन्होंने उन्होंने कहा कि आप कितना भी गठबंधन कर लें ,अगले चुनाव में एक बार फिर पूर्ण बहुमत के साथ चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वापसी करेंगे ,इसलिए गठबंधन को छोड़ दें और जनतt की सोचें वीऔर दिल्ली सेवा बिल पर बीजेजे का समर्थन करें।

