क्या मिजोरम की शांति टीम को मणिपुर की बीरेन सिंह सरकार द्वारा ठुकरा दिया गया  ?

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न्यूज़ डेस्क 
यह भी अजीब मामला है। मणिपुर में आग लगी है और विपक्ष सदन के नेता पीएम मोदी से चर्चा की मांग कर रहे हैं। और फिर भी प्रधानमंत्री चर्चा से बचते निकल रहे हैं। होना तो यह चाहिए कि मणिपुर की स्थिति पर खुद पीएम को बयान देना चाहिए था और मणिपुर को संकट से कैसे बचाया जाए उसके उपाय ढूंढने  के प्रयास किये जाने थे। लेकिन कुछ नहीं होता दिख रहा है। और इसी बीच मुद्दे को भटकाने के लिए संसद में ही भारत बनाम इंडिया का खेल हो रहा है। आजाद भारत का यह खेल अबसे पहले नहीं देखा गया था। 
     इसी बीच पूर्वोत्तर से एक बड़ी खबर आ रही है। ये खबर भी मणिपुर से ही जुडी हुई है। जानकारी के मुताबिक मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह द्वारा मिजोरम के सीएम जोरमथांगा के खिलाफ तीखे हमले के मद्देनजर, आइजोल के सूत्रों ने बड़ा खुलासा किया है। सूत्रों ने कहा है कि हिंसा प्रभावित पड़ोसी राज्य में शांति लाने में मदद करने की मिजो नेशनल फ्रंट सरकार की पेशकश को इंफाल में अधिकारियों ने ठुकरा दिया था।   
      एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया कि मई के पहले हफ्ते में हिंसा के तीन दिनों के भीतर मिजोरम सरकार ने कानून मंत्री टीजे लालनंतलुआंगा के नेतृत्व में एक शांति टीम तैनात करने का फैसला किया था। लेकिन, इस पर विचार नहीं किया गया।
                मुख्यमंत्री ने मिजोरम के गृह आयुक्त एच लालेंगमाविया को टीम की यात्रा और मणिपुर का दौरा सुनिश्चित करने का काम सौंपा था क्योंकि सीएम जोरामथांगा को लग रहा था, समस्या अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे के मुद्दे पर टकराव से भी बड़ी हो सकती है।
                इसके बाद गृह आयुक्त ने मिजोरम सरकार की पेशकश बताने के लिए मणिपुर के मुख्यमंत्री के सचिव से बात की। लेकिन लगभग एक घंटे के बाद उन्हें निगेटिव टेक्स्ट मैसेज मिला। बता दें कि एमएनएफ बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए और नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का हिस्सा है। जोरमथांगा पूर्वोत्तर राज्य के सबसे वरिष्ठ मुख्यमंत्री भी हैं।
                    बुधवार को इंफाल में कारगिल दिवस समारोह को संबोधित करते हुए बीरेन सिंह ने आइजोल में आयोजित एकजुटता रैली में उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की, जिसमें ज़ोरमथांगा भी शामिल थे। बीरेन सिंह ने जोरमथांगा से दूसरे राज्य के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का आग्रह किया था। मिजो लोग कुकी और मणिपुर के अन्य आदिवासी समुदायों के साथ जातीय बंधन साझा करते हैं। उनमें से लगभग 12,000, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, अब आइजोल और मिजोरम के अन्य स्थानों में रह रहे हैं। मिजोरम सरकार के सूत्रों ने कहा है कि राज्य की मुख्य सचिव रेनू शर्मा ने भी मई में “सद्भावना मिशन” के बारे में मणिपुर के मुख्य सचिव से संपर्क करने की कोशिश की थी। लेकिन उन्हें बताया गया था कि मिजोरम की ऐसी टीमों को अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं, इस पर केवल मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ही फैसला लेंगे।

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