बीरेंद्र कुमार झा
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो गुटों की लड़ाई में अब चुनाव आयोग भी इंट्री हो गई है। बुधवार को ही ईसीआई ने भतीजे अजीत पवार की याचिका पर चाचा शरद पवार को नोटिस भेजा है। जुलाई के शुरुआत में अजीत पवार गुट ने अलग होकर भारतीय जनता पार्टी- शिवसेना सरकार में शामिल होने का फैसला कर लिया था। उन्हें राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।
अजीत पवार गुट ने चुनाव आयोग से की थी अध्यक्ष बनने और पार्टी सिंबल दिलाने की अपील
अजित पवार गुट की ओर चुनाव आयोग से कहा गया था कि अजित पवार को एनसीपी का अध्यक्ष घोषित किया जाए।साथ ही पार्टी का चुनाव चिन्ह घड़ी भी आवंटित करने का अनुरोध किया था।अजीत पवार गुट की ओर से भारत निर्वाचन आयोग के सामने 30 जून को एक याचिका दाखिल की गई थी । 2 जुलाई को उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद उनका नोटिस 5 जुलाई को चुनाव आयोग के पास पहुंचा।
एक मीडिया रिपोर्ट में एनसीपी के महाराष्ट्र प्रमुख जयंत पाटील के हवाले से नोटिस मिलने की बात की पुष्टि की गई है।पाटिल ने कहा कि हमें शो कॉज नोटिस मिला है और हमें 30 दिनों के अंदर जवाब देना है।दूसरी तरफ यह भी अटकल लग रहा है कि खुद पाटिल भी सीनियर पवार का साथ छोड़कर अजीत गुट का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि अभीतक इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
दावे के समर्थन में दिए 40 सांसदों,विधायकों और एमएलसी के हस्ताक्षरयुक्त हकाफनामा
अजित पवार गुट की तरफ से याचिका के साथ 40 सांसदों, विधायकों और एमएलसी के हलफनामे में भी चुनाव आयोग को भेजे गए थे, जो अजीत पवार की कप्तानी का समर्थन कर रहे थे।उनका दावा था कि ऐसे में अजीत गुटका ही पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर कानूनी दावेदारी सही है ।एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग ने शरद पवार समूह को नोटिस भेजा है तो अब पार्टी के बीच तनाव भी बढ़ेगा। अजीत पवार ने अपने चाचा के खिलाफ आगे बढ़ने की तैयारी कर ली है।

