बीरेंद्र कुमार झा
मणिपुर में दो कुकी जनजाति महिलाओं को निर्वस्त्र करने और उनके साथ यौन उत्पीड़न करने के वीडियो के वायरल होने के बाद पैदा हुए आक्रोश ने मिजोरम में रहने वाले मैतेई समुदाय में दहशत पैदा कर दी है।मिजोरम में एक संगठन द्वारा मैतेई समुदाय के लोगों को धमकी दी गई है कि वे जितना जल्दी हो सके, राज्य छोड़ दें।हालात यह है कि मौतें लोगों ने मिजोरम राज्य से पलायन करना भी शुरू कर दिया है।शनिवार को कई लोग मिजोरम छोड़ कर चले गए।मैतेई समुदाय के कुछ लोग हवाई अड्डों पर और कुछ लोग अन्य सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लिए हुए हैं। इस बीच मणिपुर सरकार ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो मिजोरम से मैतेई समुदाय के लोगों को चार्टर प्लेन से सुरक्षित मणिपुर लाया जायेगा।
पीएमआरए ने दी है मिजोरम के मैतेई को धमकी
दरअसल मिजोरम के मिजो लोगों का मणिपुर के कुकी – जोमिस जनजाति के साथ एक गहरा जातीय संबंध है।ऐसे में ये पड़ोसी राज्यों की गतिविधि पर पूरी नजर रख रहे हैं। बीते 3 मई को हिंसा शुरू होने के बाद से मणिपुर के 12584 कुकी जनजाति के लोगों ने मिजोरम में शरण मांगी है। मिजोरम में पीस एक्वार्ड एमएनएफ रिटर्निज एसोसिएशन (PAMRA) मिजो नेशनल फ्रंट मिलिटेंट्स का एक इकाई संगठन है।यह संगठन कुकी और जोमीस समुदाय की महिलाओं के साथ हुई अमानवीय घटनाओं को लेकर काफी आक्रोशित हैं।शुक्रवार को एक बयान जारी कर संगठन ने मिजोरम में रहने वाले मैतेई समुदाय के लोगों को खुली धमकी दी थी।
क्या दी है धमकी
इस संगठन ने मिजोरम में रहने वाले मैतेई लोगों को धमकी देते हुए कहा था कि वे अपनी सुरक्षा के लिए जितना जल्दी हो सके राज्य छोड़ दें, बयान में कहा गया है कि मणिपुर में कुकी और जोमी समुदाय की दो महिलाओं के साथ हुई वीभत्स घटना से मिजो लोगों की भावनाएं बहुत आहत हुई है।ऐसे में अब यहां मैतेई लोगों का रहना सुरक्षित नहीं है।
मिजोरम में मैंतेई की आबादी
मिजोरम की राजधानी आइजोल में लगभग 2000 मैतेई लोग रहते हैं,जिनमें सरकारी कर्मचारी, छात्र और श्रमिक शामिल हैं।उनमें से कई असम की बाराक घाटी से है।शुक्रवार रात को बयान सामने आने के बाद मिजोरम के डीआईजी उत्तरी रेंज द्वारा एक आदेश जारी किया गया जिसमें निर्देश दिया गया कि आइजोल में मैतेई की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर स्थान पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाए। शनिवार दोपहर तक कुछ मैतेई पहले से ही राज्य से बाहर जा चुके थे।इसमें आइजोल में एक निजी कंपनी में काम करने वाली मैतेई समुदाय की महिला भी शामिल थी।
अपनी पहचान छुपाते हुए डरी सहमी पलायन कर रही महिला ने मीडियाकर्मियों को बताया कि वह अपने 4 लोगों के परिवार के साथ निजी वाहन से असम के कछार जिले में अपने घर जाएंगी।उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें मिजोरम में खतरा महसूस नहीं हुआ था।मीजो लोग बहुत सौम्य और बहुत विनम्र हैं।लेकिन अब बहुत से मैंतेई अपना सामान अपने किराएवाले घरों में छोड़कर भाग रहे हैं।बहुत से लोग बराक घाटी सड़क मार्ग से जा रहे हैं,जबकि बहुत सारे लोग हवाई अड्डे पर सुरक्षा तलाश रहे हैं।लोग काफी डरे हुए हैं।
मामले में मिजोरम सरकार का पक्ष
अफरातफरी के हालत में मिजोरम गृह विभाग ने राज्य में रहने वाले मैतेई लोगों को आश्वस्त करने क्या प्रयास करते हुए कहा है कि वे खतरे में नहीं है। मीडिया से बात करते हुए मिजोरम के गृह आयुक्त एच लेकेंगमाविया ने कहा कि मैंने आज पीएएमआरए से बात की और उन्होंने कहा है कि उनके संदेश की गलत व्याख्या की गई है। उन्होंने कहा कि यह कोई धमकी नहीं बल्कि मैतेई लोगों की सुरक्षा के लिए चिंता की अभिव्यक्ति है, जो सद्भावना से जारी की गई है। इसके प्रभाव को देखते हुए हमने संकल्प लिया है कि हम अपना बयान वापस ले लेंगे।
गृह विभाग ने भी एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है गृह आयुक्त ने ऑल मिजोरम मणिपुरी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उन्हें उनकी सुरक्षा का आश्वासन दिया।उन्होंने उनसे यह भी कहा है कि अफवाहों में से गुमराह ना हों और अपने साथी मैतेई लोगों को प्रेस वक्तव्य की दुर्भाग्यपूर्ण गलत व्याख्या के कारण राज्य न छोड़ने के लिए सूचित किया जाय ।

