मणिपुर को देखिये तो लगता है यहाँ लोकतंत्र नहीं ,अराजक तंत्र है !

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अखिलेश अखिल 

वैसे भी दिल्ली को पूर्वोत्तर की सुध कभी रही नहीं। पूर्वोत्तर में आज भी कितने राज्य राज्य है और उनकी क्या खासियत है इसकी जानकारी जनता को तो छोड़िये देश के नेताओं को भी नहीं होगी। नेताओं को राजनीति करने ,चुनाव लड़ने और ठगी ,बंटमारी और लम्पटई से फुर्सत कहाँ है कि देश ,समाज और संविधान के साथ ही देश की कला ,संस्कृति को जाने और पहचाने। फुर्सत के दिनों में भी  देश के नेता और जनता भी देश का स्वर्ग कहलाने वाले पूर्वोत्तर के राज्यों में नहीं जाते। विदेश भ्रमण की लत जो लगी है। आप पूर्वोत्तर जाइये तो लगेगा भारत की यह धरती किसी स्वर्ग से कम नहीं। लोगों का अनोखा प्यार और रंग बिरंगी झांकिया बताती है कि हमरा देश देश सचमुच कितना महान है। कितना बेजोड़ है और कितना प्यारा है।    
 लेकिन लगता है पूर्वोत्तर को किसी की नजर लग गई है। मणिपुर तो महीनो से जल रहा है। कहते हैं कि केंद्र कर मणिपुर में बीजेपी की सरकार है। डबल इंजन की सरकार ! फिर मणिपुर जला क्यों ? जल क्यों रहा है ? मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने पिछले दिनों सही ही कहा था कि दो महिलाओं के निर्वस्त्र दृश्य को देखकर पूरा देश व्याकुल है लेकिन इस तरह की हजारों घटनाएं रोज यहाँ हो रही है। और हजवो मामले दर्ज किये भी गए हैं ? कई लोग यह कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने अपनी ही सरकार की खराब स्थिति की पोल खोल दी है। लेकिन ऐसा नहीं है। सच तो यही है कि जब एक धर्म और जाति के नाम पर खेल करवाया जा रहा हो तो किसी भी इलाके की हालत ठीक वाइस ही होती है जैसा की मणिपुर में है। कल्पना से परे की कहानी। ऐसा दर्द जो न कोई बाँट सकता है और न ही कोई उस घाव पर मलहम ही गमा सकता है।  
  मजे की बात तो यह है कि इतना सब कुछ होते हुए भी मुख्यमंत्री की कुर्सी बची हुई है ! ऐसे घटिया मुख्यमंत्री को आखिर क्या कहा जा सकता है ? और यही सवाल केंद्र सरकार पर भी उठता है। अगर देश में अशांति को रोका नहीं जा सकता तो सरकार रहे या नहीं रहे इसके क्या मायने ?  संभव है कि आज मैतेई समाज के लोगों से मणिपुर की सरकार फल फूल रही हो लेकिन वक्त जब बदलेगा और मणिपुर जब संभलेगा तब शायद आज की सरकार भी न रहे और ऐसी राजनीति भी न दिखे। फिर बीजेपी और बीरेन सिंह को कौन पूछेगा ?    
 पूर्वोत्तर में यह आजाद भारत की सबसे बड़ी त्रासदी है। और इसके लिए सर्कार ही तो दोषी है ! मणिपुर की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राजधानी इंफाल के गढ़ी इलाके में महिला प्रदर्शनकारियों ने मेन रोड को दोनों तरफ से ब्लॉक कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने रोड पर टायर जलाए और पुलिस को कार्रवाई करने से रोक दिया। सूचना मिलते ही मणिपुर की सशस्त्र पुलिस, सेना और त्वरित कार्य बल के जवान मौके पर पहुंचे।सुरक्षा बलों ने तुरंत एक्शन लेते हुए स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। 
             वहीं बीते 19 जुलाई को मणिपुर में महिलाओं के साथ हुई बर्बरता का एक वीडियो वायरल हुआ तो देश में सनसनी फैल गई। वीडियो में पुरुषों की भीड़ दो महिलाओं को बिना कपड़ों के घुमाती नजर आई थी। वीडियो 4 मई का था, लेकिन दो महीने के बाद भी आरोपियों को पकड़ा नहीं गया था। वायरल होने के बाद पुलिस ने 20 जुलाई को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं आज एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया, अब तक कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।   लेकिन सबसे खतरनाक बात अब ये है कि मणिपुर के पड़ोसी राज्य मिजोरम में अब मणिपुर क चिंगारी पहुँच गई है। वहां के उग्रवादी संगठनों ने साफ तौर पर कहा है कि मिजो भी कुक समुदाय का ही वंशज है और जिस तरह से कुकी समुदाय पर हमले किये जा रहे हैं और महिलाओं के साथ घिनौना कृत्य किये गए हैं ऐसे में अब मिजो युवा भी बदला ले सकते हैं। बेहतर होगा कि मिजोरम से मैतेई समाज के लोग जल्द चले जाए क्योंकि अब उन्हें कुछ भी होगा तो इसकी जिम्मेदारी उनकी खुद होगी। हम कोई भी करवाई करने को तैयार हैं।  
  मिजोरम के कई संगठनों का यह बयान आखिर क्या कहता है ? आखिर यह सरकार कर क्या रही है। प्रधानमंत्री मोदी वहां जा क्यों नही रहे हैं ? और ऐसा कुछ नहीं हो रहा है तो इसे लोकतंत्र की बजाय अराजक तंत्र कहने में क्या बुराई है ?

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