अखिलेश अखिल
एक तरफ मोदी सरकार का दावा है कि देश अमृतकाल का महोत्सव मना रहा है क्योंकि आजादी के 75 साल हो गए। वैसे सरकार के दावे तो बहुत बातों को लेकर है। यह सरकार यह भी मानती है कि आजादी के बाद आज जो कुछ बी देश के भीतर दिख रहा है वह सब इसी अमृतकाल में संभव हो सका है। सरकार यह भी दावा करती है कि भारत विकास के पथ पर तेजी से दौड़ रहा है और देश के भीतर सर्वत्र शांति है। यह बात और है कि पूरी दुनिया का भ्रमण करने वाले पीएम मोदी मणिपुर जाने से कतरा रहे हैं। सरकार के लोग हर दिन देश के राज्यों की परिक्रमा कर रहे हैं और खुद को ही बाहुबली बता कर जनता को यह भी समझा रहे हैं कि पिछली बार से इस बार ज्यादा वोट करना है ताकि देश में स्थिर सरकार बन रहे।
सरकार का दावा यह भी है कि आजाद भारत की यह पहली सरकार है जिसकी धाक दुनिया मानती है और भारत विश्व गुरु बनने को तैयार है। आज ही पीएम मोदी ने युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटते हुए यह भी दावा किया पहले की सरकार में फोन के जरिये बैंक घोटाले होते थे लेकिन अब किसी की मजाल नहीं जो बैंक का पैसा लेकर भाग जाए। पिछले कुछ सालों में इस देश के बैंको के कितने लाख करोड़ रुपये इस देश के व्यापारी लेकर भाग चुके हैं इसकी जानकारी देश की जनता भी रखती है। लेकिन जनता बेचारी कर ही क्या सकती है ?
खैर ,दावे और भी बहुत कुछ है और हो सकते हैं। लेकिन मौजूदा सच यह है कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत से विदेशों की तरफ रुख करने वाले भारतीयों को लेकर बड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्री ने लोकसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए बताया कि भारत से विदेश गए 87,026 लोगों ने साल 2023 में जनवरी से लेकर जून तक के बीच भारत की नागरिकता छोड़ दी है और अब वे उसी देश के नागरिक बन गए हैं, जहां वे जाकर बस गए।अपने लिखित बयान में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यह भी कहा कि अब तक 17.50 लाख से ज्यादा लोगों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी है।
ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर इस देश के नागरिक अपने देश को छोड़कर क्यों भाग रहे हैं ? जब देश में सब कुछ ठीक है ,देश विश्वगुरु बनने को तैयार है तो देश के नागरिक अपनी नागरिकता को क्यों छोड़ रहे हैं ? लेकिन यह सवाल सरकार को खटक सकता है। आखिर सरकार से यह सवाल करेगा भी कौन ? विदेश मंत्री ने लोकसभा से कहा कि 2022 में 2,25,620 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी जबकि 2021 में उनकी संख्या 1,63,370 और 2020 में 85,256 थी। उससे पहले 2019 में 1,44,017 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी थी। इस हिसाब से देखा जाए तो 2011 से लेकर 2023 तक, जिस साल सबसे कम भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी थी, वह साल था 2020।
जयशंकर ने कहा, ‘पिछले दो दशक में ग्लोबल वर्कप्लेस की तलाश करने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या अहम रही है। उनमें से कई भारतीयों ने व्यक्तिगत सुविधा को ध्यान में रखते हुए विदेशी नागरिकता लेने का विकल्प चुना है।’
विदेश मंत्रालय की ऑफिशियल साइट पर यह भी देखा जा सकता है कि भारत छोड़कर विदेश में आसियाना बनाने वाले भारतीयों को कौन सा देश सबसे ज्यादा भा रहा है। पिछले साल विदेश मंत्री ने जब सभी देशों में नागरिक बने लोगों का डेटा दिया था तो उस लिस्ट में 135 देश शामिल थे। अक्सर भारतीय लोगों का सपना अमेरिका जाने का होता है। और विदेश मंत्रालय के इस डेटा ने इस बात को सही भी साबित कर दिया। 2021 में कुल 78,284 लोगों को अमेरिकी नागरिकता मिल गई। दिलचस्प बात यह है कि भारत से कुल 1,63,370 लोगों ने भारत छोड़कर विदेशी नागरिकता अपनाई थी और इसमें आधी संख्या ने अमेरिका की नागरिकता अपना ली।
दूसरे नंबर पर आस्ट्रेलिया ने अपनी जगह बनाई है। 2021 के डेटा के मुताबिक, 23,533 लोगों को आस्ट्रेलिया की नागरिकता मिली वहीं तीसरे और चौथे नंबर पर कनाडा और यूके है। जहां, 21,597 लोग कनाडा के नागरिक बने वहीं 14,637 लोग यूके के नागरिक बन गए।पांचवे नंबर पर भारत से विदेश गए सबसे ज्यादा लोगों को इटली में नागरिकता मिली। यहं नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या 5,986 थी।
दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या में कोई विदेश जाता है तो उसमें भारत अव्वल है, यानी भारत से विदेश जाने वालों की संख्या अन्य देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। अगर प्रवासी भारतीयों और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों की संख्या मिला दी जाए तो विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 3.2 करोड़ के करीब लोग विदेशों में रहते हैं। इसमें से भी 1.8 करोड़ लोग विदेशों में जाकर उस देश की नागरिकता भी ले चुके हैं। बाकी बचे प्रवासी भारतीयों की संख्या 1.35 करोड़ है।

