बीरेंद्र कुमार झा
अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले राज्य भर के फार्मासिस्ट ने राजभवन के समक्ष बुधवार को एक दिवसीय धरना दिया ।अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन रांची के अध्यक्ष कृष्णा कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 29 जून को एक बयान में कहा था कि अब पढ़े-लिखे युवा भी दवा दुकान खोल सकते हैं।अब राज्य में दवा दुकान खोलने के लिए फार्मासिस्ट डिग्री की जरूरत नहीं है ।आज हम उसी बयान का विरोध करने के लिए धरना पर बैठे हैं।उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अपना बयान वापस नहीं लेते हैं तो यह आंदोलन लंबा चलेगा । उन्होंने कहा कि फार्मेसी प्रैक्टिस रिलेशन एक्ट -2015 के तहत यह गलत बयानी है।
फार्मासिस्ट को दवाइयों की रहती है बेहतर जानकारी
धरना दे रहे प्रदेश महासचिव अमित कुमार ने कहा कि फार्मासिस्ट एक ऐसा पेसा है जिसके भरोसे किसी भी मेडिकल दुकान से दवाई लेकर कोई भी आसानी से ठीक हो जाता है, क्योंकि फार्मासिस्ट को यह पता रहता है कि किस बीमारी के लिए कौन सी दवा देनी चाहिए। अगर यही जिम्मेदारी किसी 10वीं या 12वीं पास को दी जाएगी तो वह यह समझ ही नहीं पाएगा कि बीमारी का लक्षण के हिसाब से कौन सी दवा देना सही रहेगा।
झारखंड में अब तक नहीं हुई है फार्मासिस्ट की बहाली
धरना दे रहे फार्मासिस्टों की मांग है कि झारखंड में पिछले 4 साल में करीब 6000 से ज्यादा फार्मासिस्ट का निबंधन झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में हुआ है।पिछले 23 साल से झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट की नियमित बहाली नहीं हुई है,जिस कारण झारखंड में बेरोजगार फार्मासिस्टो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

